digvijay singh

बहुचर्चित व्यापम घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय मंत्री उमा भारती और पांच अन्य के खिलाफ कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने भोपाल की स्थानीय अदालत में परिवाद दायर किया है। इस दौरान उन्होने 27 हजार पन्नों का दस्तावेज पेश किया।

राज्यसभा सदस्य एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय ने अपनी दलील में अदालत से मांग की कि व्यापमं घोटाले के मामले में चौहान, उमा एवं पांच अन्य लोगों के खिलाफ अपराधिक अभियोग चलाया जाए। उन्होंने कहा कि शिवराज को व्यापम मामले में क्लीन चिट किसने दे दी। हमने परिवाद इसलिए दाखिल किया क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत में जाने को कहा था। दिग्विजय ने सीबीआई पर गंभीप आरोप लगाते हुए कहा है कि सीबीआई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में झूठा हलफनामा दिया था। इसलिये हम उनके खिलाफ कोर्ट गए।

साथ ही दिग्विजय ने कहा कि टेंपरिंग कर एक्सलशीट में मुख्यमंत्री का नाम हटा दिया गया औऱ उमा भारती का नाम जोड़ दिया गया। इस पूरे घोटाले में सरकार अपराधियों को बचाने का काम कर रही है। एसटीएफ, एसआईटी, सीबीआई जैसी तीनों बड़ी एजेंसियां अपराधियों को पकड़ने कि बजाए उन्हें संरक्षण देने का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र व राज्य में जब कांग्रेस की सरकार आएगी तब सभी को सच्चाई पता चल जाएगी।

अदालत में दिग्विजय का बयान दर्ज होने के बाद उनकी ओर से दलील देने आए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा, ‘‘हमने इस मामले से जुड़े सारे सबूत अदालत में दे दिए हैं। वह सीडी जिसमें 48 बार सीएम (मुख्यमंत्री) लिखा हुआ हैं, वो भी दी है। एक्सेल शीट की मूल कॉपी भी कोर्ट को दे दी है।’’ सिब्बल ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों ने चौहान और उमा को बचाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा, ‘‘व्यापमं में हुए भ्रष्टाचार की जड़ इस प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं. इससे (दिग्विजय द्वारा दायर परिवाद) हम इसे साबित कर देंगे।’’

इसी बीच उमा भारती ने ट्वीट किया, ‘मुझे पता चला है कि दिग्विजय सिंह व्यापम की नए तरीके से जांच करवाने का प्रयास कर रहे हैं। मैं स्वयं यह जानने के लिये बेचैन हूं कि 2014 में मेरा नाम इसके साथ कैसे जुड़ गया, जो भी इस असलियत को सामने लाएगा वह मुझे भी बहुत बड़ी राहत देगा।’ उमा भारती ने कहा, ‘यह रहस्य खुल जाए कि व्यापम की जड़ें कहां तक थीं तो मुझे बहुत खुशी होगी क्योंकि 6 दिसंबर 2013 को मैंने खुद इस घोटाले को घिनौना बताते हुए सीबीआई जांच का सुझाव दिया था।’

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल यानी व्यापमं द्वारा मेडिकल कोर्स में प्रवेश के लिए ली गई एमपीएमटी परीक्षा एवं सरकारी नौकरियों में भर्ती के लिए ली गई परीक्षाओं में भारी धांधली हुई थी। इस घोटाले की जांच विशेष कार्य बल (एसटीएफ) कर चुकी है।

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