कोरोना महामारी के बीच यूपी के मुजफ्फरनगर में बेहद ही शर्मनाक मामला सामने आया है। जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर शुक्रताल के एक आश्रम में ‘कोरोना की दवाई’ के बहाने शराब पिलाकर बच्चों के साथ कुकर्म करने को लेकर कथित संत बाबा भक्ति भूषण गोविंद महाराज और उसके साथी मोहन दास को गिरफ्तार किया गया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, आश्रम में रहने वाले मिजोरम के एक 10 साल के बच्चे ने चाइल्ड वेलफेयर कमिटी को दिए अपने बयान में बताया, ‘महाराज हमें कोरोना की दवा पिलाते थे। उसके बाद वह नंगे होकर लेट जाते थे और हमें गंदी फिल्में दिखाते थे और हमारे साथ गंदी चीजें करते थे।’

वहीं त्रिपुरा के रहने वाले 13 साल के एक लड़के ने बताया, ‘मुझे आश्रम के कुक ने अक्टूबर 2017 में यहां लाया था। मैं यहां गुलामों की तरह रहता था। मुझे महाराज का मसाज करने और उनके लिए शराब और बीड़ी लाने के लिए कहा जाता था।…वह मेरे साथ दुष्कर्म करते थे।’

त्रिपुरा के ही 18 साल के एक अन्य लड़के ने बताया, ‘मना करने पर सजा मिलती थी। नहीं कहने का मतलब था पिटाई होना।’ मिजोरम के रहने वाले 10 साल के एक अन्य लड़के ने भी यही बात कही, ‘अगर हमने मना किया तो वह पीटता था।’ बच्चों के मां-बाप जो पैसे भेजते थे उन्हें ‘रहने का खर्च’ कहकर पूरी तरह ले लिया जाता था।

मुजफ्फरनगर के एसएसपी अभिषेक यादव ने बताया, ‘महाराज सिसौली गांव (मेरठ से 65 किलोमीटर दूर) का रहने वाला है। उसने 12 साल पहले आश्रम की स्थापना की थी।’ उसका पिछला कोई आपराधिक रेकॉर्ड नहीं है। स्थानीय लोग बताते हैं कि पहले वह चंडीगढ़ में संत बनकर रहता था और दान के रूप में बहुत ज्यादा धनराशि जुटाया था। उन्हीं पैसो से उसने यहां आश्रम बनवाया। स्थानीय लोगों के मुताबिक दो मंजिला भव्य आश्रम की इमारत को बनाने में बच्चों से काम करवाया गया था।

पूरा मामला तब बाहर आया जब आश्रम में रहने वाले हरिओम नाम के एक शख्स ने बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न का विरोध किया। उन्होंने बताया, ‘एक बार मैंने एक बच्चे से बात की, वह काफी डरा हुआ था। जब यह बात महाराज को पता चली कि मैं बच्चों से उनके डर की वजह जानने की कोशिश कर रहा हूं तो उन्होंने मुझे आश्रम से निकाल दिया।’ इसके बाद हरिओम ने चाइल्डलाइन को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी।

मुजफ्फरनगर चाइल्डलाइन की डायरेक्टर पूनम शर्मा ने बताया, ‘उसने (विसलब्लोअर हरिओम) जो कुछ भी बताया वह बहुत परेशान करने वाला था।’ भोपा पुलिस के साथ मिलकर उनकी टीम ने आश्रम में छापा मारा और वहां से बच्चों को सुरक्षित निकाला। उनके मां-बाप को जानकारी दे दी गई है लेकिन लॉकडाउन के मद्देनजर यह कहना मुश्किल है कि वे यहां कब और कैसे आ पाएंगे।

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