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बाबरी मस्जिद के स्थान पर राम बताकर मुस्लिम धर्मस्थलों को हिंदू धर्मस्थल घोषित करने की भगवा राजनीति के निशाने पर अब विश्व प्रसिद्ध हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती अजमेरी (रह.) की दरगाह है.

शिव सेना हिंदुस्तान के नाम एक हिन्दू संगठन ने सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल कर अजमेर स्थित ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह को गिराने की बात कही है. वीडियो में दरगाह के स्थान पर राम मंदिर स्थापित करने की भी धमकी दी है. जिसके चलते अजमेर में तनाव व्याप्त है.

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इस मामले में अब देवबंद के उलेमाओं ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए ऐसे संगठनों के खिलाफ सरकार से कार्रवाई की मांग करते हु इस तरह के संगठनों पर प्रतिबंधित लगाने की बात कही है.

मदरसा दारूल उलूम रशीदिया के मोहतमिम मौलाना मसरूर अहमद कासमी ने कहा कि अजमेर शरीफ स्थित दरगाह है हजारों साल से है यह सभी जानते हैं. इस दरगाह पर पहली बार इस तरह की बात सुनने को मिल रही है कि हिंदू संगठनों ने ऐसा किया है और ये हिन्दू संगठन पहले भी ताज महल के बारे में इस तरह की बात कह चुके हैं कि वहां मंदिर है तो हमारी इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग है कि ऐसे संगठनों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए और ऐसे संगठनों पर बैन लगाया जाए.

वहीँ जमियुल मारिफ देवबंद के चेयरमैन मुफ्ती अहमद का भी यही कहना है कि हमारे देश के प्रधानमंत्री ने सबका साथ-सबका विकास के नारे पर सरकार बनाई है. जब हिंदू संगठन हमारे बारे में और हमारी इस तरह की मुस्लिम संस्थाओं के बारे में प्रदर्शन करते हैं और नारे लगाते हैं और उन्हें तोड़ने की धमकी देते हैं तो इस पर यही कहना चाहेंगे कि प्रधानमंत्री से ऐसे संगठनों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करे.

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