इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ गोरखपुर के 2007 दंगों के मामले में कथित भड़काऊ बयान देने को लेकर जांच की मांग करने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है.

जस्टिस कृष्णा मुरारी और ए सी शर्मा की डिवीजन बेंच ने गुरुवार को खारिज करते हुए कहा कि अदालत ने पुलिस की जांच में कोई खामी नहीं पाई है. साथ ही राज्य सरकार द्वारा इस मामले में सीएम के खिलाफ मुकदमा ना चलाने के फैसले पर भी अदालत ने आपत्ति नहीं जताई.

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ध्यान रहे जनहित याचिका में इस पुरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई थी. ध्यान रहे गोरखपुर में 2007 में 26 व 27 जनवरी की रात में मोहर्रम जुलुस के दौरान साम्प्रदायिक तनाव हो गया था. जिसके बाद महाराणा प्रताप चौराहा पर बीजेपी के बड़े नेताओं की अगुवाई में सभा हुई. जिसमे भड़काऊ भाषण दिए गए.

याचिकाकर्ता के अनुसार, भाषण देने वालों में तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ भी थे. उनके भाषण के बाद ही दंगा भड़क गया. इस दंगे में राशिद नाम के एक युवक की भी जान चली गई थी. राशिद की मौत के बाद वादी बने परवेज परवाज ने केस दर्ज कराया लेकिन पुलिस द्वारा मामला दर्ज न करने के बाद उन्होंने अदालत का रुख किया.

अदालत के आदेश पर  योगी आदित्यनाथ के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने व उन्माद फैलाने की धाराओं सहित 302, 153ए, 153बी, 295, 295बी, 147, 143, 427, 452 के तहत कैण्ट थाना में मुकदमा दर्ज किया गया. हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा था जिसमें योगी और दूसरे के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाने का फैसला दिया गया.

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