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लखनऊ में समाज कल्याण विभाग द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में अनाथ मुस्लिम लड़कियों की हिंदू लड़कों से हिंदू रीतिरिवाजों के साथ शादी कराने का मामला बड़ा रूप ले चुका है। इस मामले में अब मुस्लिम धर्मगुरुओं ने न्यायिक जांच की मांग की है।

17 अक्टूबर को महिला एवं बाल कल्याण विभाग और समाज कल्याण विभाग की तरफ से महानगर स्थित कल्याण भवन में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में 31 जोड़ों की शादियां हुईं। इनमे चार अनाथ मुस्लिम लड़कियों का विवाह हिंदू लड़कों के साथ हिंदू रीति रिवाज से किया गया। इस दौरान रीता बहुगुणा जोशी भी रहीं। विवाह समारोह के एक दिन पहले सभी जोड़ों का स्पेशल मैरेज ऐक्ट के तहत कोर्ट में विवाह कराया गया।

मामले में इमाम ईदगाह मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि मुस्लिम नाम वाली लड़कियों की हिंदू लड़कों के साथ हिंदू रीति-रिवाज से जो शादी कराई गई इसकी जांच होनी चाहिए। जांच में यह बात सामने आनी चाहिए कि इस शादी को लेकर लड़कियों की सहमति ली गई थी या नहीं। उन्होंने कहा कि इस शादी से पहले जिला प्रशासन ने मुस्लिम मौलानाओं को विश्वास में क्यों नहीं लिया?

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शिया मौलाना सैफ अब्बास ने भी न्यायिक जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिस तरह की जिला प्रशासन ने शादी कराई है उससे हिंदू और मुस्लिमों के बीच संबंध खराब हो सकते हैं। जब स्पेशल मैरेज ऐक्ट के तहत कोर्ट में शादी करा दी गई थी तो फिर हिंदू रीति-रिवाज से मंडप में सात फेरे क्यों करवाए गए।

बता दें कि मुस्लिम नामों वाली लड़कियों की शादी हिंदू लड़कों से हिंदू रीति-रिवाज से की गई। सभी जोड़ों ने सात फेरे लिए, एक दूसरे को माला पहनाई, पंडितों ने मंत्र पढ़े और विवाह सम्पन्न हुआ। जिन चार मुस्लिम लड़कियों की हिंदू लड़कों से शादी हुई उनके नाम रिजवाना, नूरी, सीमा और सबा थे।

रिजवाना की शादी शाहजहांपुर के राजकुमार से, नूरी की शादी अलीगढ़ के बबलू से, सीमा की शादी उमेश कुमार दीक्षित और सबा की शादी हरदोई के विजय सिंह के साथ हुई।

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