दिल्ली हाई कोर्ट ने डॉक्टरी के पेशे को लेकर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि शिक्षा और चिकित्सा धन ऐंठने वाले धंधे बन गए हैं। कोर्ट ने निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में नर्सों की स्थिति को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणी की।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और जस्टिस सी हरिशंकर की पीठ ने केंद्र को नोटिस जारी कर याचिका पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। केंद्र की ओर से अधिवक्ता मानिक डोगरा ने अदालत को बताया कि नर्सों के वेतन और काम से जुड़ी स्थितियों के बारे में दिशा-निर्देश तय किए जा चुके हैं और उन्हें लागू करना हर राज्य की जिम्मेदारी है।

पीठ ने कहा कि याचिका से नर्सों के शोषण का पता चलता है। उसने कहा कि ‘अब शिक्षा और चिकित्सा फायदे का कारोबार बन चुके हैं।’

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याचिका ट्रेन्ड नर्सेस एसोसिएशन ऑफ इंडिया (टीएनएआई) की ओर से दाखिल की गई याचिका में कहा गया था कि उच्चतम न्यायालय द्वारा नर्सों के अधिकारों की रक्षा को लेकर दिशा-निर्देश दिए जाने के बावजूद निजी चिकित्सा संस्थानों में नर्सों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है

अधिवक्ता रोमी चाको की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया है कि निजी चिकित्सा प्रतिष्ठानों में नर्स ‘मामूली वेतन पर काम कर रही हैं और अमानवीय परिस्थितियों’ में रह रही हैं।

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