ar

रमजान का पाक महीना चल रहा है. ऐसे में ये पूरा महिना मुस्लिमों के लिए नेकियों का अर्जित करने का महिना है. इस मुकद्दस महीने में देहरादून के आरिफ ने अपना रोजा तोड़कर एक युवक की जान बचा कर बड़ा ही सवाब का काम किया है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मैक्स अस्पताल में भर्ती अजय बिजल्वाण (20 वर्ष) की हालत बेहद गंभीर होने की वजह से आइसीयू में भर्ती कराया गया था. लीवर में संक्रमण होने की वजह से जय की प्लेटलेट्स तेजी से गिर रही थीं. जिसके चलते उन्हें तत्काल खून की जरुरत थी.

ए-पॉजिटिव ब्लड होने की वजह से बहुत तलाश करने के बाद भी कोई डोनर नहीं मिला. ऐसे में जब सहस्रधारा रोड (नालापानी चौक) निवासी नेशनल एसोसिएशन फॉर पेरेंट्स एंड स्टूडेंट्स राइट्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरिफ खान को व्हाट्स एप ग्रुप के माध्यम से सूचना मिली तो उन्होंने अजय के पिता को फोन किया.

उन्होंने कहा कि वह रोजे से हैं, अगर चिकित्सकों को कोई दिक्कत नहीं है तो वह खून देने के लिए तैयार हैं. चिकित्सकों ने कहा कि खून देने से पहले कुछ खाना पड़ेगा, यानी रोजा तोड़ना पड़ेगा. आरिफ खान ने जरा भी देर नहीं की और अस्पताल पहुंच गए. उनके खून देने के बाद चार लोग और भी पहुंचे.

ramadan kareem 2018 images

आरिफ खान ने बताया कि `अगर मेरे रोजा तोड़ने से किसी की जान बच सकती है तो मैं पहले मानवधर्म को ही निभाऊंगा. रोजे तो बाद में भी रखे जा सकता है, लेकिन जिंदगी की कोई कीमत नहीं.’

उनका कहना है कि `रमजान में जरूरतमंदों की मदद करने का बड़ा महत्व है. मेरा मानना है कि अगर हम भूखे रहकर रोजा रखते हैं और जरूरतमंद की मदद नहीं करते तो अल्लाह कभी खुश नहीं होंगे. मेरे लिए तो यह सौभाग्य की बात है कि मैं किसी के काम आ सका.

मुस्लिम परिवार शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें

Loading...

विदेशों में धूम मचा रहा यह एंड्राइड गेम क्या आपने इनस्टॉल किया ?