Thursday, December 2, 2021

गुजरात हाई कोर्ट का फैसला – धर्म परिवर्तन के बाद भी बेटी का हिंदू पिता की संपति पर होगा अधिकार

- Advertisement -

गुजरात हाई कोर्ट ने बुधवार को एतिहासिक फैसला देते हुए कहा कि “हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम” के तहत पिता की पैतृक संपत्ति में धर्मपरिवर्तन के बाद भी बेटी का हिस्सा होगा.

नसीम बानो फिरोज खान पठान (उर्फ नैनाबेन भीखाभाई पटेल) के मामले में न्यायाधीश जेबी पर्दीवाला ने ये फैसला सुनाया है. उन्होंने अपने फैसले में कहा कि “हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम में धर्म बदलने पर वारिस को पैतृक संपत्ति से वंचित करने का प्रावधान नहीं है.” उन्होंने कहा, ये केवल धर्म बदलकर शादी करने वालों के बच्चों को उनके हिन्दू रिश्तेदारों की संपत्ति के  उत्तराधिकार लेने से वंचित करता है.

दरअसल, राजस्व विभाग ने नसीमबानो का नाम उत्तराधिकारियों की सूची से यह कहकर हटा दिया था कि वो मुसलमान बन चुकी है इसलिए वो अपने पिता की वारिस नहीं रही. हालांकि अब कोर्ट ने राजस्व विभाग को फिर से नाम शामिल करने का आदेश दिया है.

नसीम बानो ने 11 जुलाई 1990 को इस्लाम धर्म अपना लिया था. नसीमके पिता भीखाभाई का साल 2004 में निधन हो गया. नसीम ने अपने पिता की संपत्ति में से अपने हिस्से की मांग की थी. लेकिन उनके भाई और बहनों ने इसका विरोध किया. मामला स्थानीय डिप्टी कलेक्टर तक पहुंचा. उन्होंने नसीम के हक में फैसला दिया.

लेकिन कलेक्टर और राज्य के राजस्व सचिव ने डिप्टी कलेक्टर का फैसला बदलते हुए व्यवस्था दी कि नसीमबानो अपनी मर्जी से मुसलमान बनी है इसलिए उसके मामले में हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम लागू नहीं होते. अब अदालत ने कहा किपुराने हिन्दू शास्त्रीय विधि संहिता के उलट आधुनिक भारतीय कानून उत्तराधिकार के मामले में अलग व्यवस्था देता है.

- Advertisement -

[wptelegram-join-channel]

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles