तीन तलाक सहित अन्य इस्लामिक मुद्दों को लेकर विश्व प्रसिद्ध दरगाह आलाहजरत बरेली की और से बयान जारी कर कहा गया हैं कि मुस्लिम पर्सनल लॉ और तीन तलाक में एक नुक्ता भी बदलने की गुंजाइश नहीं है.

दरगाह आला हजरत स्थित अजहरी मेहमानखाने में ‘तलाक की शरई हैसियत और मुस्लिम पर्सनल लॉ’ विषय पर संबोधन के दौरान जमात रजा मुस्तफा जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं शहर काजी मौलाना असजद रजा खां कादरी ने साफ तौर पर कहा है कि यह अल्लाह का कानून है. हुकूमत और दुनिया के सारे उलमा मिलकर भी इस्लामी कानून में बदलाव नहीं कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि शरीयत में बदलाव की नहीं, बल्कि लोगों को समझाने की जरूरत है. इसलिए इस्लामी कानून का मजाक न बनाएं. जिन हालातों में तलाक है. उस पर बहस की जरूरत है. उन्होंने कहा कि  इस्लाम ने ही बेवाओं के निकाह का हुक्म दिया. यह बात भी गौर करने की है.

इस दौरान खानकाह आलिया निजामिया बंदगी अमेठी शरीफ के सज्जादानशीन मौलाना कमर गनी उस्मानी ने कहा कि तीन तलाक मुल्क के लिए इतना बड़ा मसला नहीं है कि उस बहस की जाए. मुल्क में औरतों पर तरह-तरह जुल्म हो रहे हैं और उन्हें इंसाफ नहीं मिल रहा है. हुकूमत पहले उन औरतों को सुरक्षा दे. उनकी परेशानियां दूर करे. पूरे मुल्क में आज 4 करोड़ 20 लाख बेवा औरतें हैं. उनके लिए हुकूमत बहुत कुछ कर सकती है, मगर तीन तलाक को मुद्दा बनाया जा रहा है.

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जमात के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सलमान हसन खां (सलमान मियां), खलील कादरी, मुफ्ती अफजाल रजवी, मौलाना नश्तर फारूकी. मौलाना शकील, नासिर कुरैशी, दानिश रजा, आबिद रजा, अतीक अहमद आदि मौजूद रहे. बैठक का संचालन कारी काजिम रजा ने किया.

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