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चन्दन के सलीम की बालकनी से गोली लगना संदिग्ध है - आईजी दारापुरी
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पूर्व आईजी दारापुरी

देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में इन दिनों कानून व्यवस्था सुधारने के नाम पर लगातार एनकाउंटर किये जा रहे है. अब तक 1200 एनकाउंटर हो चुके है. जिनमे 40 लोग मारे जा चुके है. इन एनकाउंटर पर अब सवाल उठाना शुरू हो गए है.

प्रदेश के रिटायर्ड आईपीएस अफ़सर और उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व आईजी एस.आर. दारापुरी ने आरोप लगाया कि इन  एनकाउंटर के जरिए दलितों और मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा, मेरी जानकारी के अनुसार एनकाउंटर में जितने लोग मारे गए हैं, उनमें अधिकतर संख्या मुसलमानों, अति पिछड़ों और दलितों की है, सवर्णों में शायद ही कोई हो.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, पुलिस एनकाउंटर अधिकतर राज्य प्रायोजित होते हैं और 90 फ़ीसदी एनकाउंटर फ़र्ज़ी होते हैं. वह कहते हैं, जब राजनीतिक रूप से प्रायोजित एनकाउंटर होते हैं तो उनमें उस तबके के लोग होते हैं जो सत्ताधारी दल के लिए किसी काम के नहीं हैं या जिन्हें वो दबाना चाहते हैं.

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उत्तर प्रदेश में सरकार को यहां आंकड़ा जारी करना चाहिए कि एनकाउंटर में मारे गए लोग किस समुदाय के थे और जिन लोगों के सिर्फ़ पैर में गोली मारकर छोड़ दी गई है, वे किस समुदाय के थे. उन्होंने बताया, पीड़ित परिवारों से मिलकर आए एक पत्रकार ने दावा किया कि एनकाउंटर में मुस्लिमों को मारा गया है और कुछ के पैरों में गोली मारकर छोड़ दी गई है, जिन्हें इलाज भी नहीं दिया जा रहा है. इसके अलावा दलित और पिछड़ी जातियों के लोग हैं.”

आत्मरक्षा में गोली चलाने की बात पर एस.आर. दारापुरी भी सहमति जताते हैं लेकिन वह कहते हैं कि जब एनकाउंटर ही फ़र्ज़ी हो तब क्या किया जा सकता है. वह कहते हैं, “मैं पुलिस विभाग में रहा हूं और 90 फ़ीसदी से अधिक एनकाउंटर को फ़र्ज़ी मानता हूं. मेरा मानना है कि असली एनकाउंटर दुर्लभ ही होते हैं. बाकी सारे एनकाउंटर व्यवस्थित या राज्य द्वारा प्रायोजित होते हैं.”