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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने मंगलवार को त्रिपुरा विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया. पार्टी की और से चुनाव आयोग के समक्ष कई गंभीर आरोप लगाए गए.

सीपीएम ने चुनाव आयोग से कम से कम 13 विधानसभा सीटों पर वीवीपीएटी पर्ची की गिनती कराने की मांग की. साथ ही करीब 90 प्रतिशत मतदान बूथों पर ईवीएम की जांच की मांग की. इसके अलावा तीन बूथों में फिर से मतदान करने की मांग भी की. पार्टी की और से भाजपा पर हेराफेरी का आरोप लगाया गया.

पुर्व सांसद निलोतपाल बसु के नेतृत्व में दल के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत से मुलाकात की और त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के बारे में कुछ चिंता व्यक्त की.बसु ने कहा, सीईसी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि आयोग इन चिंताओं को गंभीरता से विचार करेगा.

उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में बूथों में ईवीएम और वीवीपीएटी की विफलता सामने आई. 59 विधानसभा क्षेत्रों में से 3174 मतदान केंद्रों में से 519 मतदान केंद्रों पर ईवीएम को हटाना पड़ा. “मरम्मत के बाद भी, ईवीएम को बार-बार हटाया गया.

प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग को यह भी बताया कि राज्य चुनाव प्राधिकरण के अनुसार 17 फरवरी को मतदान के दिन की शाम को, कुछ इंजीनियर ने 58-पैनसगर ए.सी. के सभी मतपत्र इकाइयों, 56-धर्मनगर एसी के यूनिट के 12 मतपत्र इकाइयों, 57-जुबरानगर ए.सी. में से 3मतपत्र इकाइयों को किसी भी राजनीतिक पार्टी के प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में खोला गया. जिसको लेकर रहस्य बना हुआ है.

“इसके बावजूद हमारी आशंका मतदान के दिन सही साबित हुई। प्रारंभ में, हमारे मतदान एजेंटों को बूथों में प्रवेश करने से रोक दिया गया.  हमारे मतदाताओं की एक अच्छी संख्या को बूथों में जाने से रोका गया. दो बूथों पर ईवीएम में हमारी पार्टी का प्रतीक काफी समय बाद लगाया गया, हमारे मतदान एजेंट को जबरन बूथ से बाहर निकाल दिया गया. हमने इस ए.सी. के तीन बूथों के निम्नलिखित में फिर से मतदान की मांग की। “

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