राजस्थान की एक अदालत परिसर में लोग तब हैरान रह गए जब एक मामले में एक गाय की पेशी हुई. मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद में एक गाय को कोर्ट में पेश किया गया. सुनवाई कर रहे मजिस्ट्रेट संख्या तीन के पीठासीन अधिकारी मदन चौधरी को न्यायधीश की कुर्सी से उठकर कोर्ट रूम के बाहर आना पड़ा. इस वाकये को देखकर हर कोई हैरान था.

गाय पर एक दो लोगों के मालिकाना हक जताने की वजह से पिछले 9 महीने से केस चल रहा है. इस मामले में पिछले साल अगस्त में मंडोर पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया था. पुलिस ने अपने स्तर पर इस विवाद को सुलझाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस को कामयाबी नहीं मिली. इसके बाद केस को अदालत में भेज दिया गया.

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बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि आपसी सहमति के बाद गाय को फिलहाल एक गोशाला भेज दिया गया है, लेकिन विवाद का अंत नहीं हुआ है. शुक्रवार को गाय को उसके बछड़े के साथ अदालत में लाया गया. कोर्ट में जज मदन सिंह चौधरी के सामने दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क पेश किए. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को रखी है.

सुनवाई के दौरान पीठासीन अधिकारी मदन चौधरी कोर्ट रूम से बाहर आए. गाय को गाड़ी में ही उनके सामने पेश किया गया. इस दौरान उन्होंने मालिकाना हक जताने वाले एक पक्ष से गाय का निशान पूछा. इस पर एक महिला ने बताया कि गाय की गर्दन पर निशान है. जिसके बाद मजिस्ट्रेट ने गाय की फोटो व दोनों दावेदारों को गाय के पास खड़े कराकर फोटो लेने की बात कही.

इस मामले में दोनों पक्षों के बयान होंगे और उसके बाद मामला सुनवाई तक पहुंचेगा. बता दें कि दोनों दावेदार इस बात पर अड़े हैं कि चाहे सुप्रीम कोर्ट तक केस लड़ना पड़े वह अपनी गाय लेकर रहेंगे.

9 महीने पुराना विवाद

रिपोर्ट के मुताबिक शिक्षक श्याम सिंह उनकी गाय अचानक दो महीने पहले लापता हो गई थी. जुलाई 2018 में स्कूल से लौटते वक्त उन्हें अपनी गाय नजर आई. वे गाय को लेकर घर आ गए. 4 दिन बाद कॉन्स्टेबल ओम प्रकाश ने कहा कि ये गाय उसकी है. इसके बाद इस मुद्दे पर दोनों परिवारों के बीच ठन गई. तब जाकर दोनों ने पुलिस की मदद ली.

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