Monday, October 18, 2021

 

 

 

गोरखपुर हादसा: डॉ कफील के खिलाफ भ्रष्टाचार और निजी प्रैक्टिस का नही मिला कोई सबूत

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गोरखपुर के बीआरडी  काॅलेज में कथित तौर पर ऑक्सीजन की कमी के चलते हुई बच्चों की मौत के मामले में गिरफ्तार किये गए पूर्व प्रिंसिपल डॉक्टर राजीव मिश्रा और डॉक्टर कफील खान के खिलाफ एंटी करप्शन की विशेष कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है.

कफील खान 50 से अधिक बच्चों की मौत के 9 आरोपीों में से एक है. गोरखपुर पुलिस ने डॉ. पूर्णिमा शुक्ला, पूर्व संज्ञाहरण विभाग के प्रमुख डॉ. सतीश कुमार, पूर्व चीफ फार्मासिस्ट गजानन जायसवाल, लेखा विभाग क्लर्क सुधीर पांडे, उदय शर्मा, संजय त्रिपाठी और पुष्पा सेल्स प्राइवेट लेफ्टिनेंट मनीष भंडारी के मालिक के खिलाफ चार्जशीट भी दायर की.

मिश्रा पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 308, 40 9 और 7/13 के भ्रष्टाचार विरोधी कानून के तहत जबकि कफील के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 308 और 409 के तहत आरोप लगाया गए है. साथ ही कफील के खिलाफ मामले को और भी जटिल बनाने के लिए भ्रष्टाचार विरोधी कानून की धारा 7/13, आईटी कानून की धारा 66 और भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम की धारा भी जोड़ी गई थी.

जांच अधिकारी अभिषेक सिंह के अनुसार, डॉक्टर कफील के खिलाफ कोई पर्याप्त सामग्री या सबूत नहीं मिल पाया. जिससे साबित हो कि वह निजी प्रैक्टिस और भ्रष्टाचार में शामिल थे. साथ ही उन्होंने किसी भी आईटी अधिनियम की किसी भी धारा का उल्लंघन नहीं किया. ऐसे में इन दोनों धाराओं को हटा लिया गया.

आप को बता दें कि ऑक्सीजन खत्म होने की जानकारी मिलने के बाद डॉ कफील अपने निजी पैसों से ऑक्सीजन सिलेंडरों की व्यवस्था की थी.

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