गुजरात के राजकोट सिविल अस्पताल में एक कोरोना मरीज की कथित तौर पर अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा पीटने के बाद मौत हो गई है। मामले से जुड़ा एक वीडियो सामने आया हैं, जिसमें सिक्युरिटी गार्ड और पीपीई किट पहने स्टाफ का कर्मचारी एक कोरोना मरीज को पीटते नजर आ रहे हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल प्राधिकारियों ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि मरीज ‘‘मानसिक रूप से अस्वस्थ’’ था और उसे पीटा नहीं, बल्कि रोका जा रहा था, ताकि वह अस्पताल के कर्मियों और स्वयं को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सके। वहीं पीड़ित के भाई का कहना है कि उसका भाई मानसिक रोगी नहीं था।

भास्कर के अनुसार, वीडियो में पीपीई किट पहना एक व्यक्ति मरीज के ऊपर बैठा दिख रहा है, एक अन्य व्यक्ति उसे थप्पड़ मार रहा है और शांत रहने को कह रहा है। एक सुरक्षाकर्मी भी मरीज को काबू करने के लिए बलप्रयोग करता दिख रहा है। मामले में अस्पताल के सुपरिटेंडेंट पंकज बुच का कहना है मानसिक रूप से अस्वस्थ मरीज प्रभाशंकर कोरोना पॉजीटिव भी था। वह बार-बार नाक में लगी नली निकाल कर फेंक रहा था। इसीलिए अस्पताल स्टाफ उसे सिर्फ रोकने की कोशिश कर रहा था।

डॉ. पंकज बुच ने कहा, ‘‘अस्पताल कर्मी केवल यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे थे कि मरीज दूसरों को या अपने को कोई नुकसान न पहुंचा दे। कर्मियों ने उससे शांत रहने की अपील की थी, लेकिन उसने उनकी बात नहीं सुनी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उसने अपने कपड़े उतारने की भी कोशिश की, इसलिए अस्पताल कर्मियों ने उसे रोकने और वापस उसके बिस्तर पर ले जाने की कोशिश की।’’

वहीं मृतक के भाई ने कहा कि इस वीडियो से पता चला कि मेरे भाई की मौत कोरोना से नहीं, बल्कि अस्पताल स्टाफ की मारपीट से हुई थी। मृतक के भाई का कहना है कि उसके भाई की किडनी का इलाज पहले राजकोट के गिरिराज अस्पताल में चल रहा था। इलाज के दौरान उसकी कोरोना रिपोर्ट पॉजीटिव आने के बाद सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। जबकि मेरे भाई की मौत कोरोना से नहीं, बल्कि अस्पताल स्टाफ की मारपीट से हुई है। भाई का कहना है कि अस्पताल झूठ बोल रहा है कि मेरा भाई मानसिक रूप से अस्वस्थ था।

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