Friday, September 24, 2021

 

 

 

MSO के सम्मेलन में वरिष्ठ पत्रकारो ने CAB और NRC पर रखे विचार

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सम्भल: मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इण्डिया (एमएसओ) की ज़िला सम्भल यूनिट ने ‘CAB और एनआरसी के प्रभाव’ नामक विषय पर एक कांफ्रेंस आयोजित की। जिसमे आईबीएन-7 और इण्डिया न्यूज़ के संपादक रहे प्रशांत टंडन, वरिष्ठ पत्रकार अख़लाक़ उस्मानी, तहरीक उलमा ए हिन्द के सदर मुफ़्ती खालिद अय्यूब मिस्बाही, एमएसओ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शुजात अली क़ादरी ने मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया।  साथ ही शहर के उलमा, समाजसेवी, अधिवक्ताओं के साथ सेकड़ों लोगो ने प्रोग्राम में हिस्सा लिया! प्रोग्राम की अध्यक्षता मौलाना नफीस अख्तर साहब ने की।

मुख्य अतिथि प्रशांत टंडन ने कैब और एनआरसी को विस्तार से समझाया तथा कैब के बारे में बोलते हुए कहा कि यह बिल संविधान की मूल भावना के खिलाफ है, इसलिए देश में सेक्युलर लोग और शांतिप्रिय समाज जिनकी संख्या फिरकापरस्तों के मुकाबले बहुत ज़्यादा है वो सभी लोग इस असंवेधानिक बिल के खिलाफ खड़े है। साथ ही हमे चाहिए कि इंसानियत व आपसी भाईचारे पर काम करने वाले लोगों को पहचानें और हर मोड़ पर उनको अपने साथ रखें, ताकि हमारे देश में अमन व भाईचारा कायम रह सके।

वहीं वरिष्ठ पत्रकार अख़लाक़ उस्मानी ने कहा कि, संविधान में अनुछेद 5 से लेकर 11 तक नागरिकता के बारे में बताया गया है लेकिन किसी जगह भी नागरिकता को धर्म के आधार पर देने की बात नहीं की गयी है, यह बिल संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का भी अतिक्रमण करता है। यह स्पष्ट है कि सरकार इस कानून के माध्यम से जल्दबाज़ी में है। सरकार ने संसदीय समिति की रिपोर्ट में दर्ज कड़े विरोध को दरकिनार किया है। भारत में भाईचारा कायम करने वाले और संविधान पर यकीन रखने वाले हर व्यक्ति वर्तमान विधेयक के विरोध में हैं।

राष्ट्रीय अध्यक्ष शुजात अली क़ादरी ने कहा की सीएबी सिर्फ मुस्लमानों के लियें चिंता का विषय नहीं बल्कि यह भारत की जमहूरीयत (लोकतंत्र) और भारत में रहने वाली दूसरी बहुत सी क़ौमों का भी मामला है इसलिए इस बिल के खिलाफ मुसलमान और दूसरी क़ौमें भी कड़ा विरोध कर रही हैं। सदर मुफ़्ती खालिद अय्यूब मिस्बाही ने लोगो से अपील की, इस संविधान विरोधी बिल की क़ानून के दायरे में रहते हुए तब तक मुखालफत करें जब तक यह बिल वापस नहीं हो जाता लेकिन ऐसा कोई काम न करें जिससे देश के कानून व शांति व्यवस्था को खतरा हो। क्योंकि यह मुल्क हमारा है और इसमें अमन और भाईचारा बरक़रार रखने की ज़िम्मेदारी भी हमारी है।

अमनपसंद व संविधान से मुहब्बत रखने वाले भारतीय बिल्कुल नहीं चाहेंगे कि भारत की छवि एक धार्मिक राष्ट्र के रूप में बने। आखिर में कारी इरफ़ान लतीफी व प्रदेश कन्वेनर मोहम्मद वसीम बरकाती ने आने वाले मेहमानों व लोगों का शुक्रिया अदा किया।

इस मौके पर मुख्य रूप से सय्यद वामिक अली , मौ० शुऐब वास्ती, मुबीन अशरफ, मुनीब आदिल, मौ०फ़ाज़िल, गज़नफर अली, क़ासिम जीलानी, दानिश कमाल, मौ० रेहान वारिस अली, मौलाना तौसीफ मिस्बाही, मौलाना आरिफ, मौलाना कामिल मिस्बाही, मुदब्बिर अली, आदि लोग रहे।

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