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बंगलुरु: कर्नाटक के डीजीपी ने अल्प्संखयक समुदाय के खिलाफ 5 सालों से लंबित सांप्रदायिक हिंसा के केस को वापस लेने का सर्कुलर जारी किया है.

समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक यह सर्कुलर केवल पिछले पांच सालों के दौरान दर्ज हुए केसों पर ही लागू होगा. सरकार ने इस कदम को युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उठाया है. सरकार का कहना है कि इस कदम के बाद ऐसे केसों में फंसे लोग को आत्मविश्वास के साथ भविष्य के लिए आगे बढ़ेंगे.

वहीँ बीजेपी ने सरकार के इस कदम को ‘मुस्लिम तुष्टीकरण’ करार दिया. बीजेपी प्रवक्ता अमित मालवीय ने कहा, ‘सिद्धारमैया मुसलमानों का तुष्टीकरण कर रहे हैं। कर्नाटक में कांग्रेस बहुत परेशान है, उनके पास चुनावों के लिए कुछ ज्यादा नहीं है.’

इस सबंध में विधान परिषद सदस्य रिजवान अरशद ने कहा कि “बीजेपी किस मुंह से यह सवाल उठा रही है. उसके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने साथ-साथ 20000 कार्यकर्ताओं से जुड़े मामले वापस लिए. दरअसल मुस्लिम संगठनों का एक प्रतिनिधिमंडल गृह मंत्री से मिला था और उन मामलों में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था जो संगीन नहीं हैं जैसे उन मामलों में जिनमें कोई घायल नहीं हुआ है. हमारी सरकार ने इन्हीं मामलों में पुलिस से उनकी राय मांगी है.”

सरकार ने अपने बचाव में कहा, ‘यह सर्कुलर सभी अल्पसंख्यकों के लिए लागू है और इसमें अंतरराज्यीय जल विवाद पर आंदोलन के दौरान गिरफ्तार लोगों को भी शामिल किया गया है.’

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