हनुमान को दलित बताने के बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक और विवादित बयान सामने आया है। जिसको लेकर संत समाज उनसे नाराज हो गया। इस बार उन्होने वाल्मीकि पर विवादित बयान दिया है।

टाइम्स नाउ के मुताबिक, अयोध्या में योगी आदित्यनाथ ने कहा ‘महर्षि वाल्मीकि उन लोगों में हैं जिन्होंने हमें भगवान राम से मिलवाया और फिर भी हम वाल्मीकि समुदाय के लोगों को अस्पृश्य (untouchables) मानते हैं। जब तक हम इस पाखंड को रोक नहीं देते तब तक हमें उनका आशीर्वाद नहीं मिलेगा।’

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आदित्यनाथ के इस बयान पर राम मंदिर और राम जन्मभूमि ट्रस्ट के प्रेसिडेंट ने आपत्ति जताई। उन्होंने इसे भगवान राम और संत समाज का अपमान करार देते हुए कहा कि महर्षि वाल्मीकि रामायण के लेखक थे और उनका दलित वाल्मीकि समुदाय से कोई लेना देना नहीं है।

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इससे पहले राजस्थान के अलवर जिले के मालाखेड़ा में एक सभा को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने बजरंगबली को दलित, वनवासी, गिरवासी और वंचित करार दिया था। योगी ने कहा कि बजरंगबली एक ऐसे लोक देवता हैं जो स्वयं वनवासी हैं, गिर वासी हैं, दलित हैं और वंचित हैं।

इस बयान को लेकर भी जमकर बवाल मचा था। इस मामले में शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा था कि हनुमान जी को दलित कहना अपराध है। मुख्यमंत्री का यह बयान बेहद दुखद है।

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