उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा कैबिनेट की पहली बैठक में प्रदेश के किसानों को एक लाख रुपये तक की कर्ज माफ़ी देने का फैसला लिया गया हैं. योगी सरकार के इस फैसले से 2.15 करोड़ किसानों को लाभ मिलेगा.

यूपी सरकार को इस फैसले पर 30 हजार 729 करोड़ रुपये खर्च करना होगा. इसके अलावा सात लाख किसानों का 5630 करोड़ एनपीए भी माफ किया गया है. इसके अलावा केबिनेट ने किसानों से 80 मैट्रिक टन गेहूं खरीद का फैसला भी लिया हैं. हालांकि योगी सरकार के इस फैसले को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने धोखा करार दिया.

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उन्होंने कहा, वादा पूर्ण कर्ज माफी का था, किसी सीमा का नहीं. एक लाख की सीमा से करोड़ों किसान ठगा सा महसूस कर रहे हैं. ये गरीब किसानों के साथ धोखा है. वहीँ कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि कदम अच्छा है, पर अर्धसत्य है. ऊंट के मुंह में जीरा, नहीं हुआ वादा पूरा. हर कर्जदार किसान के हिस्से सिर्फ 16000 रुपये आए हैं. जबकि सरकार कैसे लाख रुपये का दावा कर रही है.

योगी सरकार के इस फैसले किसान भी खुश नजर नहीं आ रहे हैं. भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के सदस्य धर्मेद्र सिंह ने कहा, ‘हम राज्य सरकार के रुख का स्वागत करते हैं और इससे बहुतों को फायदा होगा. लेकिन बहुत कम लघु किसान फसली कर्ज लेते हैं, इसलिए इससे कोई फायदा नहीं मिलने वाला… प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव से पहले वादा किया था कि सभी किसानों का पूरा कर्ज माफ कर दिया जाएगा, न कि सिर्फ कुछ किसानों का.”

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