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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के जनता दरबार में ट्रांसफर की मांग लेकर पहुंची एक महिला शिक्षक को उन्होने अपशब्द कहने का आरोप लगाकर सस्पेंड कर दिया था। इस मामले मे अब नया मौड़ आ गया है। आरोपी शिक्षिका से खुद शिक्षा मंत्री ने माफी मांगी है।

फोन पर शिक्षिका से बात करने के बाद शिक्षामंत्री ने तीन जुलाई को उनसे मिलकर समस्या का समाधान निकालने का आश्वासन भी दिया है। शिक्षिका ने बताया कि शिक्षामंत्री अरविंद पांडे ने उनसे संपर्क किया और कहा कि वह मुझसे तीन जुलाई को मिलेंगे और मेरी समस्या का समाधान करेंगे।’

शिक्षिका ने कहा, ‘जब मैंने उन्हें बताया कि शिक्षा विभाग ने मेरे साथ कितना अन्याय किया तो उन्होंने मुझसे माफी भी मांगी। बता दें, शिक्षिका बीते गुरुवार को सीएम दरबार में ट्रांसफर की मांग लेकर पहुंचीं थीं।

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उत्तरकाशी जिले की प्राइमरी शिक्षिका पिछले 25 सालों से नौकरी कर रही है। विधवा होने वह अपने बच्चों को अकेले पाल रही है। देहारादून मे अपने ट्रांसफर को लेकर उन्होने सीएम से निवेदन किया था। साथ ही उन्होंने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के बीजेपी के नारे को लेकर भी तंज़ कसा था।

जिस पर सीएम रावत भड़क गए। दोनों के बीच तू तू-मैं मैं बढ़ता गया। सीएम ने भी ‘इसे तुरंत सस्पेंड करो और बाहर निकालो’ का आदेश जारी कर दिया था। फिर भी शिक्षिका रुकी नहीं तो फोर्स बुलाकर शिक्षिका को जनता दरबार से बाहर किया गया। आखिर मे पुलिस ने शिक्षिका के खिलाफ चालान भी किया।