भोपाल सेंट्रल जेल से कथित रूप से फरार होने के बाद शहर के बाहरी इलाकें में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए सिमी सदस्यों के मामले में सभी पुलिस अधिकारियों को क्लीन चीट मिल गई है. इन सभी को ज्यूडिशियल इन्क्वायरी में क्लीन चीट मिली है.

कथित रूप से जेल से फरार इस सभी सिमी सदस्यों को भोपाल के पास मालिखेड़ा में एनकाउंटर में मारा गया था. जिसके बाद शिवराज सरकार ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस एसके पांडे की अध्यक्षता में न्यायिक जांच का आदेश दिया था.

हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस एसके पांडे ने 9 महीने की जांच के बाद एडिशनल चीफ सेक्रेटरी जनरल एडमिनिस्ट्रेशन प्रभांशु कमल को 12 पेज की ज्यूडिशियल इन्क्वायरी की रिपोर्ट के साथ सैकड़ों पेज के एनेक्सचर सौंपे हैं.

ज्यूडिशियल इन्क्वायरी में हालात और परिस्थिति का हवाला देते हुए एनकांउटर को सही ठहराया गया है. कमीशन ने रिपोर्ट में कहा है कि ग्रामीणों ने बताया कि सिमी आतंकियों को पुलिस ने मनीखेड़ी गांव के आसपास घेरकर उन्हें सरेंडर करने को कहा था, लेकिन उन्होंने पुलिस पर गोलीबारी करना शुरू कर दी.

रिपोर्ट में कमीशन ने 42 सीसीटीवी कैमरे में से चार को खराब पाया. जो सिमी सदस्यों की सेल में लगे थे. इसके अलावा 70 की बजाए सिर्फ 40 स्टाफ ही ड्यूटी पर थे. साथ ही भागने की खबर मिलने पर भी बाकी सुरक्षा गार्ड ने अलार्म या सिटी बजा कर बाकी को अलर्ट नहीं करने को मुख्य वजह माना.

मारे गए कैदियों के नाम शेख मुजीब, खालिद, मजीद, अकील खिलजी, जाकिर, महबूब, अमजद, सलिक थे. ये सभी सिमी के कथित सदस्य थे.

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