केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली में 300 से अधिक वक्फ संपत्तियों के अधिग्रहण करने को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है.

याचिका में केंद्र, दिल्ली सरकार, दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर और वक्फ बोर्ड को वक्फ संपत्तियों के कब्जे को पुनर्स्थापित करने के लिए दिशा निर्देश मांगा गया है जिसे सरकार द्वारा कोई मुआवजा दिए बिना कथित रूप से कब्जा कर लिया गया है. याचिकाकर्ता अधिवक्ता शाहिद अली ने कहा कि केंद्र के संबंधित अधिकारियों के इरादे बदनीयती वाले है. साथ ही , न्याय के सिद्धांतों के विपरीत और नागरिकों के मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है.

याचिका में कहा गया कि जब कोई भी सरकार सरकार द्वारा जमीम अधिग्रहित करती है, तो उसके मालिक को एक मुआवजा मुआवजा दिया जाता है. लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया. क्योंकि इस जमीन का मालिक खुदा है और खुदा को मुआवजा नहीं दिया जा सकता.

याचिका में कहा गया, वक़फ़ अधिनियम 1995 की धारा 51 के तहत सरकार द्वारा या संस्था द्वारा क़फ़ जमीन का आबंटन या उसका अधिग्रहण शून्य है. ऐसे में वक्फ की संपत्तियों को दिल्ली वक्फ बोर्ड के पक्ष में बहाल करने की मांग की गई.

याचिका में बताया गया, केंद्र की और से जिला उत्तर में 48 वक्फ संपत्ति, जिला दक्षिण में 165 वक्फ संपत्ति, जिला पश्चिम में 32 वक्फ सम्पति, जिला पूर्व में 24 वक्फ संपत्तियों इसके अलावा जिला पूर्व में 11 वक्फ संपत्ति, जिला दक्षिण-पूर्व में 140 वक्फ संपत्ति, उत्तर-पश्चिम जिले में 5 वक्फ संपत्ति, जिला शाहदरा में 8 वक्फ संपत्तियों और जिला-दक्षिण-पश्चिम में 28 वक्फ संपत्तियों को अधिग्रहित किया गया.

इससे पहले, उच्च न्यायालय ने 8 अगस्त को राजधानी में 90 वक्फ संपत्तियों से जुड़े अतिक्रमणकों के खिलाफ बेदखली का लंबित आदेश को लागू करने का आप सरकार सहित अन्य एजेंसियों को आदेश दिया था.

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