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राजस्थान की वसुंधरा सरकार जयपुर के जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में 22 करोड़ रुपये की लागत से ‘राजस्थान मंत्र प्रतिष्ठान’ की स्थापना की है। जिसके तहत  कैंसर, ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन जैसी बीमारियो का इलाज मंत्रो के जरिए किया जाएगा।

बीते 24 सितंबर को मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर व राज्य की संस्कृत शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी की और से इस प्रतिष्ठान का उद्घाटन  किया गया। प्रतिष्ठान के कार्यवाहक निदेशक डॉ. नारायण होसमने ने बताया कि इसमें मंत्र चिकित्सा पद्धति से कई बीमारियों को इलाज किया जाएगा।

उन्होने कहा, ‘सदियों से वेद मंत्रों को पढ़ने की विशेष प्रक्रिया है। वेदों के मंत्र विभिन्न छंदों में सुंदर तरीके से संजोए हुए हैं। इन मंत्रों पर वैज्ञानिक काम होने की जरूरत है। प्रतिष्ठान में डिप्रेशन और ब्लडप्रेशर जैसी बीमारियों के साथ ही कैंसर जैसे गंभीर रोगों का इलाज मंत्र चिकित्सा पद्धति से किया जाएगा।’

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होसमने ने बताया कि ‘ध्वनि विज्ञान ने मंत्रों की शक्ति को माना है। मंत्र प्रतिष्ठान में रिसर्च के द्वारा मंत्रों का जनकल्याण के लिए उपयोग खोजा जाएगा। इसके अंतर्गत तंत्र, मंत्र व यंत्र विद्या का आधुनिक संदर्भों में प्रयोग किया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसका फायदा हो। प्रतिष्ठान में वेद, उपनिषद, स्मृति, रामायण, महाभारत और गीता समेत पुराणों पर गहरा अनुसंधान किया जाएगा।’

हालांकि जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल के अधीक्षक रहे डॉ. नरपत सिंह शेखावत ने सवाल उठाते हुए कहा कि ‘मंत्रों से बीमार आदमी के इलाज का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। बीमारी दवाई लेने से ठीक होती है न कि मंत्र सुनने से मंत्रों से बीमारी कैसे ठीक होगी, यह मेरे लिए कौतुहल का विषय है।

वहीं अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कहा, ‘मनोवैज्ञानिक बीमारियों में तो मंत्र जैसी चीजें फिर भी फायदेमंद हो सकती हैं, लेकिन आॅर्गेनिक बीमारियों में यह पूरी तरह से बेअसर साबित होगी। इस प्रकार से सीधे इलाज का दावा करने की बजाय रिसर्च ट्रायल करना चाहिए ताकि हम भी देखें मंत्रों से कैसे बीमारी ठीक होती है।’’

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