एशिया की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी का गोरव प्राप्त कोलकाता यूनिवर्सिटी में 159 वर्षों के इतिहास में पहली बार ‘इफ्तार पार्टी’ का आयोजन होने जा रहा हैं.

यूनिवर्सिटी में सरस्वती वंदना को छोड़कर बाकि सभी प्रकार के धार्मिक कार्यों पर प्रतिबन्ध हैं. लेकिन इस बार यूनिवर्सिटी ने अपने रुख में बदलाव करके इफ्तार कराने का एतिहासिक फैसला लिया है जिसका छात्रों से लेकर यूनिवर्सिटी स्टाफ ने स्वागत किया है.

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सोगाता मरजयत ने रमज़ान के रोज़े को त्याग, समर्पण और भाईचारा संज्ञा देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय विभाग अरबी और फारसी के पूर्व छात्रों ने इस दावत का आयोजन किया है हम उसका स्वागत करते हैं. यह एक अच्छी पहल है. जहाँ इफ्तार का एक पहलू धार्मिक है वहीं इसका एक दूसरा सामाजिक पहलू भी है.

यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार सोम बनर्जी ने इफ्तार पार्टी में शामिल होकर कहा कि इफ्तार पार्टी सामाजिक भाईचारा बढाने में मददगार है यूनिवर्सिटी सामाजिक भाईचारा बढाने वाले किसी भी मज़हब के उत्सव को अनुमति देगी.

कोहराम न्यूज़ को सुचारू रूप से चलाने के लिए मदद की ज़रूरत है, डोनेशन देकर मदद करें




Loading...

कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें