मस्जिद में खड़ा होकर दूल्हा करेगा दहेज नहीं लेने का ऐलान, फिर होगा निकाह

7:12 pm Published by:-Hindi News
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दहेज के खिलाफ बिहार के पश्चिमी चंपारण के मुसलमानों ने सामाजिक जंग छेड़ दी है। अब हर दूल्हे को निकाह से पहले मस्जिद में खड़े होकर ये ऐलान करना होगा कि वह दहेज नहीं लेगा। तभी मौलाना निकाह पढ़ाने को राजी होंगे।

इलाके के उलेमाओं ने निर्णय लिया कि दहेज की जानकारी मिलने पर वे निकाह कतई नहीं पढ़ाएंगे। साथ ही दहेज लेने और देने वालों दोनों का सामाजिक बहिष्कार होगा। मौलानाओं ने कहा, इस्लाम में दहेज लेने की सख्त मनाही है। दहेज लेना और देना शरीयत के खिलाफ है। दहेज न लेना ही अल्लाह के दरबार में सच्ची खिदमत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह चेतावनी या फतवा नहीं, बल्कि दहेज के खिलाफ मुस्लिम समाज का ऐलान है।

मौलाना मुबारक हुसैन ने कहा कि इस्लाम में मेहर खुशी और मर्जी से देने की बात कही गई है। इससे दहेज का कोई लेना-देना नहीं है।  उन्होंने कहा कि कुरान में दहेज का कोई जिक्र नहीं है। इस्लाम में लड़कियों को संपत्ति का अधिकार दिया गया है, लेकिन दहेज का कोई स्थान नहीं है। दहेज के कारण मुस्लिम समुदाय में शादियां टूट रही हैं। अब दहेज के खिलाफ धार्मिक आंदोलन की शुरुआत होने लगी है।

वहीं मुफ्ती मोहम्मद ग्यासुद्दीन ने कहा कि यदि दहेज लिया गया तो जिस किसी गांव में बरात जाएगी, वहां का काजी निकाह नहीं पढ़ाएगा। मुस्लिम समाज में दहेज प्रथा की विकृति फैल गई है। समाज दहेज और बाल विवाह जैसी कुप्रथा से ग्रसित हो गया है।

दहेज के खिलाफ ये जंग केवल चंपारण तक ही सीमित नहीं है। बल्कि नेपाल तक जारी है। नेपाल के मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी इस प्रकार ही दहेज के खिलाफ ऐलान ए जंग की है।

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