नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पंसारे मर्डर केस को लेकर सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा है कि देश इस वक्त बुरे दौर से गुजर रहा है, जिसमें कोई व्यक्ति स्वतंत्र होकर ना कुछ कह सकता है और ना ही घूम सकता है।

हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि हम आज देश में एक बुरे दौर के गवाह बन रहे हैं। देश के नागरिकों को लगता है कि वो अपनी आवाज स्वतंत्र होकर और बिना किसी परेशानी के नहीं कह सकते हैं। क्या हम ऐसा दिन देखने जा रहे हैं, जब हर कोई व्यक्ति को खुलेआम बोलने और घूमने के लिए पुलिस सुरक्षा की जरुरत होगी?

मराठा आंदोलन पर टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा कि “आज राज्य में क्या हो रहा है? लोग आ रहे हैं और बसों में आग लगा रहे हैं, पत्थर फेंक रहे रहे हैं। आपकी प्राथमिकताएं क्या हैं? एक राज्य है और उसके बाद एक सरकार है। शायद कल सरकार बदल जाए, लेकिन उस राज्य का क्या जो कई मिलियन लोगों का घर है? क्या सभी को अपने मन की बात बोलने के लिए पुलिस प्रोटेक्शन की जरुरत पड़ेगी।”

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कोर्ट ने कहा कि इस तरह की घटनाओं का समाज पर गंभीर परिणाम होता है इसलिए हमें भी चिन्ता है कोर्ट ने ये भी कहा सरकार बदलती रहती है लेकिन देश का क्या ? ऐसे ही हालात बने रहेंगे तो हर नागरिक को सुरक्षा देनी होगी। कोर्ट ने इसमें आरक्षण शब्द का इस्तेमाल नही किया है। कोर्ट ने आंदोलन शब्द का इस्तेमाल किया है।

इस दौरान सीबीआई ने कोर्ट के सामने बंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट सौंपी। कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान जांच रिपोर्ट तलब की थी। लेकिन हाईकोर्ट ने इस रिपोर्ट को लौटा दिया और कहा कि इस रिपोर्ट में कुछ भी नया नहीं है।

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