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राजस्थान हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी को अवैध निर्माण को बढ़ावा देने संबंधी मामले की सुनवाई  के दौरान खरी-खरी सुनाई है. कोर्ट ने परनामी से कहा कि सत्ता का नशा सर चढ़कर बोल रहा है.

न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश वीके व्यास की खंडपीठ ने परनामी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे प्रदेश अध्यक्ष हैं तो क्या कोर्ट की अवमानना करेंगे ? ध्यान रहे परनामी पर आरोप है कि उन्होंने पिछले साल नवंबर में जवाहर नगर सेक्टर 4 में पार्क की जमीन पर पार्किंग विकसित करने के लिए अपनी मंजूरी दी थी, जो कोर्ट के आदेश के खिलाफ है.

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा- वे (अशोक परनामी) प्रदेश अध्यक्ष हैं तो क्या कोर्ट की अवमानना करेंगे? क्या वे हाईकोर्ट को खरीद लेंगे?  सुनवाई के दौरान अदालती आदेश की पालना में परनामी अदालत में पेश हुए.

अदालत के पूछने पर उन्होंने बताया कि समाचार पत्र में उनके बयान को पूरा नहीं छापा है. इस पर अदालत ने कहा कि यदि समाचार पत्र में गलत छपा है तो उन्होंने पत्र को मानहानि का नोटिस क्यों नहीं दिया ? इस पर परनामी ने कहा कि वह न्यायपालिका का सम्मान करते हैं. वहीं उनके वकील ने मामले में जवाब पेश करने के लिए समय मांगा. इस पर अदालत ने मामले की सुनवाई 23 फरवरी को रखते हुए जवाब पेश करने के आदेश दिए.

आप को बता दें कि पिछले साल 17 नवंबर को यहां के लोगों से परनामी ने कहा था कि हाईकोर्ट से स्टे होने के कारण सरकार पार्क में पार्किंग निर्माण नहीं कर सकती है, लेकिन यहां के लोग ऐसा करते हैं तो हम आंखें बंद कर लेंगे. याचिका में कहा गया कि इस बयान से न केवल न्यायपालिका की साख गिरी है, बल्कि आमलोगों में भी न्यायपालिका के प्रतिष्ठा धूमिल हुई है.

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