ut

ut

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकास के दावों के बीच आज भी देश की जनता भूखे मरने को मजबूर है. भूख से मरने की ये घटनाएँ कहीं और नहीं बल्कि उनकी पार्टी के शासन वाले झारखंड में एक के बाद एक पेश आ रही है.

राज्य के गढ़वा ज़िले में एक बार फिर से ऐसा ही मामला सामने आया है. कोरता गांव की प्रेमनी कुंवर की मौत खाना न मिलने के कारण भूख की वजह से हुई. हालांकि प्रशासन इस बार भी मानने को तैयार नहीं है.

मृतका के बेटे उत्तम ने बताया की कि, घर में खाने के लिए कुछ भी नहीं है, पिछले एक महीने से घर में कुछ भी नहीं बना है. ममी (प्रेमनी कुंवर) कमजोर हो गई थीं. वह चल भी नहीं पा रही थीं। मैं राशन लाने गया था लेकिन वहां सिर्फ अंगूठा लिया गया और 2 दिसंबर को आने के लिए कहा गया. भूख से तड़पकर मेरी मां मर गई.’

जांच में खुलासा हुआ कि उत्तम के परिवार को अंतिम बार सरकारी दुकान से राशन 28 अक्टूबर को मिला था. पीडीएस डीलर ने 29 नवम्बर को अंगूठा लिया था लेकिन राशन नहीं दिया.

इस बारें में गढ़वा की उपायुक्त (डीसी) नेहा अरोड़ा ने बताया कि हमारी जांच अभी जारी है. शुरुआती तौर पर हमें कुछ जानकारियां मिली हैं, जिससे साबित होता है कि प्रेमनी कुंवर की मौत भूख से नहीं हुई थी. ध्यान रहे इससे पहले भी इस तरह के चार मामले सामने आ चुके है. जिनमे एक नाबालिग बच्ची भी शामिल है.

Loading...

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें