उत्तरप्रदेश में किसानों का कर्ज माफ़ करने के वादे के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली भारतीय जनता पार्टी ने महाराष्ट्र में किसानों की कर्ज माफ़ी से साफ इनकार कर दिया हैं.

राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट कहा कि कर्ज़माफ़ी देंगे तो विकास कार्यों के लिए पैसा नहीं बचेगा. अकेले राज्य की इतनी क्षमता भी नहीं है. दरअसल राजधानी मुंबई में महाराष्ट्र विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान विपक्ष ने किसानों की कर्ज माफ़ी की मांग की थी. जिस पर फडणवीस ने ये बात कही.

याद रहे महाराष्ट्र में कर्ज से परेशान किसानों ने बड़े पैमाने पर आत्महत्या की हैं. जो अब भी जारी हैं. 2009 में हुई कर्जमाफी के बावजूद 2010 से अब तक 16 हजार किसान आत्महत्या कर चुके हैं. 2010 में 3141, 2011 में 3337, 2012 में 3786, 2013 में 3146 और 2014 में 2568 किसानों ने मौत को गले लगाया हैं.

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मुख्यमंत्री ने कहा, विपक्ष जिस कर्जमाफी की मांग कर रहा है वो उन्हें इसलिए चाहिए ताकि उनकी बैंकों में पैसा आ सके और वे बैंकों के स्कैम को उससे ढक दें. किसान कर्जमाफी का महाराष्ट्र की सरकार विरोध नहीं करती. लेकिन, ये काम योजनाबद्ध तरीके से होना चाहिए जिसके लिए सरकार प्रयासरत है. किसान का क़र्ज़ माफ़ करने की बजाए उसे क़र्ज़ चुकाने के लिए सक्षम बनाना होगा. जिनके कर्ज़ माफ होते हैं उन्हें दुबारा क़र्ज़ नहीं मिलता.

जूदा स्थिति में 31 लाख 57 हजार किसानों का 30,500 करोड़ रुपये का क़र्ज़ मियाद के आगे चल रहा है. इतना पैसा अकेले राज्य सरकार की तिजोरी से जाएगा तो न किसान के लिए पैसा बचेगा न विकास कार्यों के लिए.

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