जबलपुर: भाजपा नेता एस. के. मुद्दीन द्वारा तीन तलाक को इस्लामिक शरीअत के खिलाफ बताए जाने पर उनके खिलाफ फतवा जारी हुआ हैं. जिसमे उनके सामजिक बहिष्कार की बात कही गई हैं. यह फतवा स्थानीय दारूल उलूम अहले सुन्नत की और से जारी किया गया हैं.

फतवे में एस. के. मुद्दीन से अपने बयान को वापस लेने और माफ़ी मांगने की मांग करते हुए कहा गया कि जब तक ये लोग माफी नहीं मांगते, तब तक इनसे रिश्ता-नाता तोड़ा जाये. इस्लामिक स्टडी सेंटर दारूल उलूम अहले सुन्नत के मुफ्ती मोहम्मद असरार अहमद अशरफी सिमनानी ने ये फतवा 23 जनवरी को जारी किया है.

सिमनानी ने तीन तलाक के मामले में मुद्दीन के बयान को इस्लाम विरोधी बताते हुए उन्हें और उनके दो अन्य साथियों नसीम बेन एवं शाकिर कुरैशी को माफी मांगने कोे कहा है. मुद्दीन पिड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम के उपाध्यक्ष तथा मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के नेता हैं.

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मुद्दीन ने आज पीटीआई-भाषा को बताया, इस फतवे को जारी करने वालों के खिलाफ वह मानहानि का दावा अदालत में करेंगे. मुद्दीन ने कहा, हम शरियत के साथ हैं, लेकिन तीन तलाक के खिलाफ हैं. कुरान में भी तलाक को गुनाहे-ए-अजीम माना गया है.

उन्होंने कहा, कुरान में तलाक नहीं लेने की हिदायत भी दी गयी है. तलाक कुरान शरीफ और शरियत की रोशनी में दिया जाये. उन्होंने कहा, जो गलत तरीके से तलाक देते हैं, हम उनके विरोध में हैं. मुद्दीन ने कहा कि गलत बयानी कर फतवा लेने व देने वालों के खिलाफ मानहानि का दावा करेंगे.

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