20 अप्रैल को सहारनपुर में हुई हिंसा की जांच करने के लिए समाजवादी पार्टी ने अपना पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर भेजा था. प्रतिनिधिमंडल ने अपनी जांच में सांसद राम लखनपाल शर्मा और उनके समर्थकों को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया हैं.

प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि शर्मा ने पुलिस से मुसलमानों पर गोली चलाने को कहा था लेकिन जब पुलिस ने ऐसा करने से इनकार कर दिया तो हिंसा शुरू कर दी. प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, शर्मा ने कहा था, “इन सूअरों (मुसलमानों) पर गोली चलाओ। मैं यहां का मुखिया हूं और मैं तुम्हें आदेश दे रहा हूं कि तुम इन पर गोली चलाओ। अब हमारी राज्य में सरकार है”

टू सर्किल्स के मुताबिक, सपा प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि जब पुलिस बल ने सांसद राम लखनपाल शर्मा के आदेश का पालन नहीं किया, तो उनके छोटे भाई राहुल लखनपाल शर्मा ने पुलिस अधिकारियों का कॉलर पकड़ लिया और उन्हें धमकी दी. उसी दौरान सांसद, उनके भाई और उनके समर्थकों ने पुलिस अधिकारियों पर हमला बोला था और हिंसा शुरू कर दी थी.

गौरतलब है कि भाजपा ने सहारनपुर जिले में 20 अप्रेल को डॉ. भीमराव अंबेडकर की शोभायात्रा निकाली थी. लेकिन सांसद राम लखनपाल सिंह और उनके समर्थकों ने जानबूझकर उस इलाके अपने जुलूस को ले गए जहां पर प्रशासन ने प्रतिबंध लगाया था. पर सांसद और उनके समर्थकों ने शरारतन जुलूस का रुख गांव की तरफ मोड़ दिया.

लेकिन जैसे ही शोभायात्रा जनकपुरी थाने के दूधली इलाके पहुंची, स्थानीय लोगों और भाजपा समर्थकों के बीच गाली-गलौज और पथराव शुरू हो गया. बाद इसके भाजपा सांसद और उनके समर्थकों ने पुलिस बल पर भी पथराव शुरू कर दिया था. इस दौरान भाजपा और हिन्दू संगठन के लोगों ने एसएसपी लव कुमार के आवास को घेर लिया और वहां के सीसीटीवी कैमरे, नेम प्लेट को तोड़ दिया.

इसके अलावा उन्होंने कई दुकानों में तोड़फोड़ की और उसका सामान लूट लिया. आगे चलकर मामला इतना संगीन हो गया कि डीएम और एसएसपी तक को भागकर अपनी जान बचानी पड़ी.

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