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कथित गौरक्षा के नाम पर राजस्थान का अलवर बीते दिनों दुनिया भर के अखबारों की सुर्खियों में रहा। मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा के चलते कई बार यहाँ का माहौल तनावपूर्ण हुआ। लेकिन विधानसभा चुनाव में बीजेपी को इस धुर्वीकरण की कोई मदद नहीं मिल सकी। बीजेपी के खाते में 2 सीटें आईं, जबकि पिछले चुनाव में 9 सीटें मिली थीं।

परिणाम के अनुसार,  बीजेपी को विधानसभा चुनाव में अलवर (शहरी) और मुंडावर सीट पर जीत मिली। जबकि तिजारा, किशनगढ़ बास, बहरोर, बंसुर, थंगाजी, अलवर (ग्रामीण), काठुमार और राजगढ़ लक्ष्मणगढ़ सीट पर हार का मुंह देखना पड़ा, जहां 2013 के चुनाव में उसे जीत मिली थी।

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तिजारा में बीएसपी उम्मीदवार संदीप कुमार यादव ने यादव और बीएसपी के दलित वोट खींचकर बीजेपी वोट बैंक को बड़ा नुकसान पहुंचाया। इसी तरह किशनगढ़ बास में बीएसपी के दीप चंद, बीजेपी के रामहत सिंह यादव के खिलाफ गुज्जर और जाट वोटों को अपने खाते में खींचने में सफल रहे।

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भरतपुर में बीजेपी को और ज्यादा नुकसान हुआ जहां बीजेपी ने 2013 में 6 में से 5 सीटें जीती थीं लेकिन इस बार एक भी नहीं मिली। यहां एससी और एसटी वोट नदबई और नागर में बीएसपी उम्मीदवार के खाते में ट्रांसफर हो गए। नागर में बीएसपी कैंडिडेट वाजिब अली ने मुस्लिम, जाट और दलित वोटों को सुरक्षित कर बीजेपी को तीसरे स्थान में भेज दिया।

बता दें कि राजस्थान के अलवर जिले में हरियाणा के रहने वाले मुस्लिम युवक पहलू खान को गोहत्या के शक में भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला। पिछले साल अप्रैल 2017 में हुई इस घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था। इसके बाद इसी साल जुलाई में रकबर खान नाम के एक और शख्स को गो तस्करी के आरोप में पीट-पीट कर मार दिया गया था।

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