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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया में लोग भूख से मरने को मजबूर है. ऐसा कही और नहीं बल्कि उनकी पार्टी केशासन वाले झारखंड में हुआ है. अब ऐसे में राज्य सरकार इसका ठीकरा अफसरों पर फोड़ती नजर आ रही है.

राज्य के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने कहा कि उनके अफसर उनके किसी भी निर्देश का पालन ही नहीं करते. उन्होंने सीएम के मुख्य सचिव राजबाला वर्मा को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये वैसे लोगों का राशन कार्ड को रद्द करने का निर्देश दिया था, जिनके पास आधार कार्ड नहीं है.

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ध्यान रहे सिमडेगा में राशन कार्ड के आधार से लिंक न होने पर बीते 6 महीनों से एक आदिवासी परिवार को राशन देना बंद कर दिया गया था. जिसके चलते 4-5 दिनों से भूखी बच्ची की मौत हो गई. घटना की स्वतंत्र जांच करने वाली फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने भी माना कि बच्ची की मौत भूख से ही हुई.

टीम का कहना है कि संतोषी के परिवार को 6 महीने से राशन नहीं मिला. राशन देने वाले का कहना है कि परिवार का राशन कार्ड आधार नंबर से जुड़ा नहीं है. इसलिए राशन नहीं दिया गया. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार आधार कार्ड नहीं होने से सरकार किसी को राशन के लाभ से वंचित नहीं कर सकती.

बच्ची की माँ कोयला देवी ने बताया कि वह वार्ड के पार्षद और मुखिया सहित कई लोगों से मदद मांगने गई किसी ने मदद नहीं की. वह कई दिनों तक जंगलों में उगे पेचकी साग, गेठी, भाजी साग और करैला आदि खाकर रह रहे थे. लेकिन बीते दिनों कुछ खाने को नहीं मिलने से बच्ची की मौत हो गई.

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