bihar dalit student scholarship released after warn over suicide

बिहार के क़रीब 60 दलित छात्रों ने सोमवार को धमकी दी थी कि अगर सरकार ने उनकी बकाया छात्रवृत्ति का भुगतान न किया, तो वे आत्महत्या कर लेंगे.

हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के शोध छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद पूरे देश में विरोध-प्रदर्शनों और दलित छात्रों की आत्महत्या की धमकी के बाद बिहार सरकार हरकत में आई.

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के मंत्री संतोष कुमार निराला ने बुधवार को कहा कि 30 छात्रों की छात्रवृत्ति जारी कर दी गई है और बाक़ी छात्रवृत्ति भी जांच के बाद जारी की जाएगी.

ये भुवनेश्वर के राजधानी इंजीनियरिंग कॉलेज (आरईसी) के छात्र हैं जिन्होंने 2014 में आरईसी में दाखिला लिया था.

इनमें डिप्लोमा से लेकर एमबीए तक के छात्र हैं. लेकिन डेढ़ साल तक जब कॉलेज प्रबंधन को छात्रवृत्ति के पैसे नहीं मिले, तो उसने छात्रों को निकाल दिया.

हालांकि आत्महत्या की धमकी के बाद हरकत में आए विभाग का कहना है कि इन छात्रों को कॉलेज से निकाला नहीं गया है.


छात्रों को बिहार के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग की ओर से पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम के तहत छात्रवृत्ति मिलनी है.

मोतिहारी निवासी लोकनाथ कुमार भी उन छात्रों में हैं जो डिप्लोमा कर रहे हैं.

लोकनाथ कहते हैं, ”मैंने छात्रवृत्ति के सहारे पढ़ने के विचार से दाखिला लिया था, लेकिन छात्रवृत्ति के कारण ही मेरी पढ़ाई बरबाद हो रही है. मैं छात्रवृत्ति के लिए मोतिहारी और पटना के चक्कर लगाकर थक गया हूँ.”

लोकनाथ के मुताबिक़ उनके पिता खेतिहर मज़दूर हैं, जिन्होंने उनकी पढ़ाई के लिए क़र्ज़ लिया, जिससे उनकी रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी होती थीं.

वह बताते हैं, ”हमारे पास संपत्ति के नाम पर दो कट्ठा ज़मीन है, जिससे परिवार का पेट पलता है. अगर छात्रवृत्ति न मिली, तो हम यह ज़मीन भी बेचने को मजबूर हो जाएंगे.”

बेतिया निवासी यशवंत कुमार.

बेतिया निवासी यशवंत कुमार भी यहीं से डिप्लोमा कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि पटना स्थित कल्याण विभाग के अधिकारी कहते हैं कि उनका नाम छात्रवृत्ति की सूची में नहीं है, जबकि ज़िला कल्याण कार्यालय कहता है कि वह मेरा नाम चार बार राज्य कार्यालय को भेज चुका है.

यशवंत बताते हैं कि उनके पिता उन्हें और उनके भाई को खेत बेचकर पढ़ा रहे हैं.

आरईसी से डिप्लोमा कर रहे मोतिहारी के परसौनी निवासी मुकेश कुमार की भी तक़रीबन यही कहानी है.

उन्होंने बताया, ”मेरे पिता छोटे किसान हैं. स्कॉलरशिप न मिलने से उन्हें अब तक 40 हज़ार रुपए का क़र्ज़ लेना पड़ा है.”

रोहित वेमुला की आत्महत्या के खिलाफ प्रदर्शन.

मुकेश ने बताया, ”पहले कल्याण विभाग ने कहा कि मेरे आवेदन के साथ लगा जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र ठीक नहीं है. मैंने उस कमी को सुधार दिया. फिर भी मुझे छात्रवृत्ति नहीं मिली. परिणाम यह हुआ कि कॉलेज ने हमें निकाल दिया.” हालाँकि अब 30 छात्रों की स्कॉलरशिप जारी कर दी गई है.


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