कथित तौर पर भ्रष्टाचार सहित अन्य आरोपों की जांच से नेताओं और कर्मचारियों को बचाने वाले बिल को लेकर वसुंधरा सरकार की मुसीबत बढ़ गई है. राजस्थान हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर सरकार से जवाब तलब किया है.

ध्यान रहे इस संबंध में हाईकोर्ट कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट समेत 7 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. कोर्ट ने सरकार को जवाब देने के लिए 27 नवंबर तक का समय दिया है. इस सबंध में केंद्र सरकार से भी जवाब मांगा गया है.

न्यायाधीश अजय रस्तोगी व दीपक माहेश्वरी की खंडपीठ ने प्रार्थियों से पूछा की इस अध्यादेश से क्या कोई प्रभावित हुआ है? क्या किसी मामले में एफआईआर दर्ज करने से इनकार किया गया है?

इस पर प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता भगवत गौड़ ने बताया कि जयपुर जिला कलेक्टर के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति नहीं दी गई और इसी तरह नगर निगम के अफसरों पर भी मामला दर्ज करने मना किया गया.

याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिकाओं में विवादित विधेयक को अभिव्यक्ति की स्वंत्रता के खिलाफ और भ्रष्ट अफसरों को बचाने वाला बताया है.

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