मध्यप्रदेश की 27 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले एक बड़ा घोटाला सामने आया है। उद्यानिकी विभाग (Horticulture Department) में करोड़ों रुपए का घोटाले के खुलासे ने शिवराज सरकार के लिए बड़ी परेशानी पैदा कर दी है।

एनडीटीवी के अनुसार, नेताओं-अफसरों की मिलीभगत से घोटाले को अंजाम दिया गया। इसके लिए अफसरों ने नियम बदल डाले और किसानों को घटिया उपकरण मुहैया कराए। इतना ही नहीं किसानों को मिलने वाली सब्सिडी का हिस्सा भी सीधा निजी कंपनी को भुगतान कर दिया गया। वहीं दूसरे मामले में सरकार की महत्वकांक्षी नमामि देवी नर्मदे योजना में करोड़ों के पौधे सिर्फ कागजों पर ही लगा दिये गये।

मध्यप्रदेश उद्यानिकी विभाग के भोपाल दफ्तर में मौजूद छोटे से पावर टिलर (Power Tiller) ने मध्यप्रदेश में करोड़ों को उद्यानिकी घोटाले की परतें खोली हैं। कृषि इंजीनियर, एसपी अहिरवार ने बताया, ” 85000 किसान को सब्सिडी देने का है मॉडल वाइज, वीडर अलग चीज है निंदाई, गुड़ाई के लिये काम आता है पावर टिलर छोटा ट्रैक्टर है कृषि कार्य के लिये उपयोग होता है।”

मंदसौर के किसान मुकेश पाटीदार ने बताया, ‘भारत सरकार का नियम है कि सिर्फ औऱ सिर्फ डीबीटी (सब्सिडी सीधा खाते में ट्रांसफर होना चाहिए) होना चाहिये।  कोई भी अनुदान हो किसान के खाते में ही आना चाहिये। इनके द्वारा ऐसा नहीं किया।  वेंडर पेमेंट कर रहे हैं। इसमें तो एक ही व्यक्ति को ठेका दे दिया। ये बड़ा घोटाला है। बिहार के चारा घोटाले से बड़ा।’

मामले में पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने कहा, “नर्मदे नमामि योजना कितनी पब्लिसिटी, 70 करोड़ का भुगतान हुआ पेड़ लगे ही नहीं, हमारे कृषि मंत्री ने उद्यानिकी विभाग के घोटाले को पकड़ात, इसलिये की गुजरात का व्यापारी संलग्न है, ईमानदार हो तो 10 साल की जांच करवाओ।”

बता दें कि 2017-18 में शिवराज सिंह ने नमामि देवी नर्मदे के तहत पौधे लगाने का दावा गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए किया था, यंत्रीकरण केन्द्र के ही बीजेपी सरकार की महत्वकांक्षी योजना है। लेकिन योजनाएं भ्रष्टाचार से सींची जा रही हैं।

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