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लखनऊ: हाल ही में प्रदेश की राजधानी में हुए इन्वेस्टर्स समिट में बड़ा घोटाला किया गया है। इन्वेस्टर्स समिट में की गई साज सज्जा और आयोजन के खर्च पर एक के बाद एक चौकाने वाले राज सामने आ रहे है।

जानकारी के अनुसार, आलमबाग से राजधानी तक गमले पहुंचाने पर 32 लाख रुपए तो फूलों की सजावट को लेकर 3.29 करोड़ रूपए के वारे-न्यारे किए गए। हालांकि गड़बड़ी सामने आई तब सरकार ने भुगतान करने पर रोक लगा दी। ये आदेश 8 मार्च को जारी किया गया। मगर इस मामले में भी विभाग के रिकॉर्ड से पता चलता है कि सरकार की रोक के बाद भी 31 मार्च तक 83 लाख रुपए का भुगतान किया गया।

फूलों की सजावट पर कुल 329.26 लाख रूपए का खर्च बताया गया जिस पर 150 लाख रूपए तत्काल जारी करते हुए शेष 179.26 लाख रूपए और मांगे गए। फूलों की सजावट पर इतनी अधिक धनराशि खर्च होने पर वित्तीय अनियमितता की शिकायत पर उद्यान मंत्री दारा सिंह ने जांच के आदेश दिए और फिर विभागीय प्रमुख सचिव सुधीर गर्ग ने स्पेशल आॅडिट टीम गठित की, लेकिन आगे कुछ न हुआ।

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शुक्रवार देर रात उद्यान मंत्री दारा सिंह चौहान ने बताया कि फूलों की सजावट में वित्तीय अनियमितता होने की जानकारी पर उन्होंने प्रमुख सचिव को जांच कराने  के आदेश दिए थे लेकिन, उन्हें अब तक जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। चौहान ने कहा कि अब एपीसी द्वारा कराई जाने वाली जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

रिपोर्ट बताती है कि सभी सामान उद्यान प्रभारी संजय राठी और तबके उद्यान अधीक्षक धर्मपाल यादव ने खरीदा। जानकारी के मुताबिक कहां से फूल खरीदने हैं। सजावट का काम किसे सौंपना है। सामान ढुलाई का काम किसे सौंपना है। सारे काम बिना किसी नियम के इन्हीं दोनों अफसरों ने तय कर दिए। खबर के अनुसार धर्मपाल अभी तरक्की पाकर उप निदेशक के पद पर सहारनपुर में तैनात हैं जबकि संजय 25 सालों से लखनऊ में ही तैनात हैं।

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