दशकों से बीजेपी का साथ निभाने वाली शिवसेना ने बीजेपी को किनारे करते हुए कांग्रेस के साथ सरकार बनाने का संकेत दिया हैं. बीएमसी पर कब्जे के बहाने शिवसेना महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव करने जा रही हैं.

मेयर पद के चुनाव के लिए शिवसेना की और से बीजेपी को किनारे कर कांग्रेस का दामन थामने की खबर हैं. शिवसेना की और से कांग्रेस को डेप्युटी मेयर के पद का ऑफर किया है. इसके साथ ही शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस के नेताओं से भी मुलाक़ात की हैं. हालांकि वहीँ कांग्रेस इस संभावित गठबंधन में बाहर से सहयोग का मन बना रही है.

उद्धव ठाकरे से मुलाकात में महाराष्ट्र कांग्रेस के चीफ अशोक चव्हाण सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता थे. इस बैठक में मुंबई कांग्रेस चीफ संजय निरुपम भी शामिल हुए. कांग्रेस के विधायक अब्दुल सत्तार ने सीधे तौर पर इस नए गठबंधन की संभावना की और इशारा किया हैं.

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उन्होंने कहा, शिवसेना की तरफ से समर्थन का प्रस्ताव मिलने के बाद पार्टी इसपर फैसला करेगी. उन्होंने कहा कि शिवसेना को न केवल मुंबई बल्कि दूसरे नगर निकायों में समर्थन के लिए भी पार्टी आलाकमान को प्रस्ताव भेजा जा सकता है. कांग्रेस से गठजोड़ के लिए पहले उसे बीजेपी से नाता तोड़ना होगा. कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने शिवसेना से संभावित गठजोड़ के लिए उसे बीजेपी से नाता तोड़ने को कहा है. अगर नए समीकरण बने तो इसमें फडणवीस सरकार भी खतरे में पड़ सकती है.

बीएमसी चुनावों में शिवसेना और बीजेपी को क्रमश: 84 और 82 सीटें मिली हैं. बीएमसी में कुल 227 सीटों पर बहुमत के लिए 114 सीटें होनी जरूरी हैं. ऐसे में कांग्रेस 31 सीटें पाकर भी किंगमेकर की संभावित भूमिका में आती दिख रही है. 4 निर्दलीय नगरसेवक पहले ही शिवसेना को अपना समर्थन दे चुके हैं.

वहीँ फडणवीस सरकार गिराकर नई सरकार बनाने के लिए एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने नए समीकरण पेश किया हैं. विधानसभा में शिवसेना के 63, कांग्रेस के 42 और एनसीपी के 41 विधायक हैं. इन तीनों के मिलने से यह संख्या 146 हो जाएगी। सरकार बनाने के लिए 144 विधायकों का समर्थन चाहिए. फिलहाल बीजेपी के 122 और शिवसेना के 63 विधायकों के योग से फडणवीस सरकार चल रही है.

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