छेड़खानी की शिकायत पर कार्रवाई नहीं करने को लेकर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय जल उठा था, लेकिन वाइस-चांसलर गिरीश चंद्र त्रिपाठी पर इस का कोई फर्क नहीं पड़ा है. दरअसल, इतने बड़े बवाल के बावजूद भी उन्होंने यौन उत्पीड़न के “दोषी” प्रोफेसर को अहम पद पर नियुक्ति दे दी.

राष्ट्रवाद की दुहाई देने वाले त्रिपाठी ने मंगलवार को विश्वविद्यालय की एक्जिक्यूटिव काउंसिल (ईसी) की बैठक में ओपी उपाध्याय को बीएचयू परिसर में स्थित सर सुंदरलाल अस्पताल का मेडिकल सुपरिटेंडेंट नियुक्त किया है.

ध्यान रहे ओपी उपाध्याय यौन उत्पीड़न का दोषी है. उपाध्याय की नियुक्ति को लेकर विरोध शुरू हो चूका है. लेकिन वाइस-चांसलर उपाध्याय को नियुक्त करने पर तुले हुए है. फिजी की एक अदालत ने साल 2013 में उपाध्याय को एक 21 वर्षीय महिला के यौन उत्पीड़न का दोषी करार दिया था.

इस बारें में  त्रिपाठी ने कहा, ऐसा प्रस्ताव था और मुझे याद है कि उस पर आपत्ति की गयी थी. लेकिन ये मामला इलाहाबाद कोर्ट में लंबित है तो हमें कोर्ट के आदेश का इंतजार करना होगा.”

अपनी नियुक्ति को लेकर उपाध्याय ने कहा, ”यूनिवर्सिटी ने मेरे मामले में कानूनी सलाह ली है और ये तय हुआ कि देश से बाहर की अदालत का फैसला हमारे यहां लागू नहीं होगा.” उन्होंने सफाई पेश करते हुए कहा कि मामला फिरौती का था मैंने विरोध किया तो मुझे झूठे मामले में फंसा दिया गया.

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