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बिहार के नए पुलिस महानिदेशक के एस द्विवेदी ने अपना पदभार संभाल लिया है. द्विवेदी का विवादों से पुराना नाता रहा है. साथ ही उनकी एक ऐसी शख्सियत भी रही है कि मुख्यमंत्री तो छोडिये देश के प्रधानमंत्री तक उनका ट्रांसफर नहीं कर पाए.

दरअसल बात उन दिनों की है जब रामजन्मभूमि मुद्दा देश भर में जोर पकड़ रहा था. इसे अछूता बिहार का भागलपुर भी नहीं था. अक्टूबर-नवंबर 1989 में जो भागलपुर दंगा हुआ, उसमें हुए नरसंहार के लिए हम भागलपुर के तत्कालीन सीनियर सुपरिटेंडेंट (SSP) के एस द्विवेदी को जिम्मेदार माना जाता है.

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दंगों की कमीशन ऑफ इनक्वायरी (CoI) की रिपोर्ट में साफ़ लिखा है कि 24 अक्टूबर और इसके बाद की तारीखों में जो हुआ, उन सबके लिए SSP द्विवेदी पूरी तरह जिम्मेदार हैं. इन दंगों में सरकारी दस्तावेजों में मरने वालों की संख्या 1,000 है.  तो वहीँ गैर सरकारी आकडे करीब 1,000 और ज्यादा बताते है. इन दंगों में मरने वालों में करीब 93 फीसद मुसलमान थे.

इन दंगों के बाद खुद तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी भागलपुर दौरे पर आए थे. जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद जांच रिपोर्ट ने द्विवेदी को दंगे के लिए जिम्मेदार मानकर ट्रान्सफर कर दिया गया. लेकिन राजीव गाँधी के इस फैसले का विहिप और बीजेपी ने जमकर विरोध किया. आखिर में ट्रांसफर को रोकना पड़ा. इस दंगे की वजह से मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिन्हा को कुर्सी छोड़नी पड़ी थी.

अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर दके एस द्विवेदी ने का कहना है कि भागलपुर दंगे की जांच कमेटी की एक ओपिनियन को पटना हाई कोर्ट 1996 में और सुप्रीम कोर्ट 1998 में खारिज कर चुका है. इसी फैसले को आधार बनाकर राज्य सरकार ने उनका नियमित प्रोमोशन किया और उत्‍कृष्‍ट सेवा के लिए पुरस्‍कृत भी किया है.

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