press conference photo

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झारखंड में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर राज्य की बीजेपी शासित सरकार ने 1989 के अपराधी कानून संशोधन कानून की धारा 16 के अंतर्गत प्रतिबंध लगा दिया है. साथ ही संगठन के 12 नेताओं के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज की है.

इस बारें में संगठन की और से प्रेस कांफ्रेंस कर कहा गया कि हम पुलिस द्वारा किए गए उत्पीड़न की निंदा करते हैं और राज्य सरकार से प्रतिबंध हटाने और हमारे कैडर पर झूठे मामलों को वापस लेने की मांग करते हैं. झारखंड सरकार संगठन के खिलाफ कुछ साबित नहीं कर पाई बल्कि को दक्षिणी राज्यों से संबंधित कुछ नकली रिपोर्टों को आधार बनाया गया है.

प्रेस कांफ्रेंस में सवाल उठाते हुए कहा गया कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर प्रतिबंध लगाने के पीछे वास्तविक कारण क्या है? राज्य में संगठन की घोषणा के बाद से, हमारे सदस्य मानव अधिकारों के उल्लंघन, घृणास्पद भाषण, पुलिस अत्याचारों के खिलाफ लड़ाई में सबसे आगे खड़े रहे. साथ ही सभी को पता है कि झारखंड की हिंदुत्व सरकार और उसकी पुलिस पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के कार्यकर्ताओं से राज्य में कई दुर्घटना के मामलों को उजागर करने के लिए नाखुश हैं.

संगठन की और से कहा गया, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने पीड़ितों के रिश्तेदारों द्वारा मामले दाखिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. जैसे कि जमतरा, लातेहार, रामगढ़ और सराईकेला में. इसके अलावा पाकुर में भाजपा नेता हसीबी रॉय के नफरत भरे भाषण के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कराई गई.

इनमे से भीड़ द्वारा मारे जाने वाले और पुलिस अत्याचारों के खिलाफ दो मामले भी शामिल है. जो पाकुर एसपी और एसपी जामरा के खिलाफ है.  पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया लोकतांत्रिक और कानूनी तौर तरीकों से लड़ने के लिए पीड़ितों को सक्षम कर रहा था. साथ ही पीड़ितों और कमजोर वर्गों में आत्मविश्वास का निर्माण कर रहा था. जिसकी वजह से झारखंड में संगठन को निशाना बनाया गया है.

झारखंड सरकार वास्तव में सीएलए अधिनियम के दुरुपयोग से अप्रत्यक्ष तरीके से न्यायपालिका को विफल करने की कोशिश कर रही है. किसी भी संगठन पर प्रतिबंध लगाने का कार्य जो कि लोगों के अधिकारों के लिए खिलाफ है. ये सभी नागरिक समूहों और जन आंदोलनों के लिए एक चेतावनी है कि असहमति की कोई आवाज बर्दाश्त नहीं होगी.

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया हमारे संविधान के महान आदर्शों जैसे लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और मौलिक अधिकारों में विश्वास करता है. हम कानून के शासन और न्यायपालिका की भूमिका का सम्मान करते हैं. हम झारखंड में प्रतिबंध के खिलाफ  कानूनी सहारा का सहारा लेंगे. हमें उम्मीद है कि अंततः सत्य जीत होगी और लोगों का अधिकार को बहाल किया जाएगा.

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