मराठों आरक्षण के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग ने आज अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में आयोग ने मराठों को 16 प्रतिशत आरक्षण देने की सिफारिश की है। इस रिपोर्ट से मराठों को आरक्षण मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट में मराठा समुदाय को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक आधार पर पिछड़ा माना गया है। रिपोर्ट पर महाराष्ट्र सरकार में मंत्री का कहना है कि इस रिपोर्ट को बॉम्बे हाई कोर्ट को नहीं सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा, ‘हम इस रिपोर्ट पर कैबिनेट मीटिंग में चर्चा करेंगे। हम मराठों को आरक्षण देने के लिए बिल लाएंगे और विधानसभा से कानून पारित करवाएंगे। अगर कोई इस कानून को कोर्ट में चुनौती देगा तो ही हम यह रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेंगे।’

आयोग ने कहा है कि जिस राज्‍य में 30 प्रतिशत आबादी मराठा हो, वहां पर 16 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना चाहिए।इसी के साथ यह भी कहा गया है कि मराठों को आरक्षण देने के दौरान ओबीसी कोटे में कोई परिवर्तन नहीं किया जाए। अगर इस आरक्षण पर मोहर लगती है तो सभी श्रेणियों को मिलाकर राज्‍य में कुल आरक्षण 68 प्रतिशत हो जाएगा। अभी राज्‍य में अलग-अलग वर्ग को मिलाकर 52 प्रतिशत आरक्षण है।

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दूसरी और राज्य की बीजेपी सरकार मुस्लिम आरक्षण की मांग पर पूरी तरह से खामोशा है। राज्य में मराठा आरक्षण की तरह मुस्लिम समाज 5 फीसदी आरक्षण की मांग कर रहा है। बता दें कि राज्य में जब कांग्रेस की सरकार थी, तब अध्यादेश लाकर मुस्लिम समाज को 5 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था। समाज को उसका फायदा भी मिलने लगा था, लेकिन बीजेपी सरकार ने उस अध्यादेश को बिल में नहीं बदला, जिससे अध्यादेश खत्म हो गया। इससे मुस्लिम समाज को मिला आरक्षण भी खत्म हो गया।

ध्यान देने योग्य बात ये भी है कि मुसलमानों की स्थिति को देखते हुए मुंबई हाईकोर्ट ने भी शिक्षा के क्षेत्र में मुस्लिम आरक्षण को सही माना था, फिर भी सरकार ने मुसलमानों को आरक्षण नहीं दिया। साथ ही रंगनाथ मिश्र व सच्चर कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ किया है कि मुस्लिम समाज काफी पिछड़ा है। उसे सरकार के सहयोग की जरूरत है।

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