दुनिया के सबसे खराब नरसंहारों में से एक गुजरात दंगों के दोषी और दक्षिणपंथी संगठन बजरंग दल के कार्यकर्ता बाबु बजरंगी ने हाईकोर्ट से अपनी जमानत याचिका वापस ले ली हैं.

2002 के नरोदा पाटिया नरसंहार मामले में सेकड़ों बेगुनाहों के खून की होली खेलने वाले इस हत्यारे ने ‘अंधापन और एक कान में बहरेपन’ को आधार बनाकर जमानत की याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की थी. याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने साबरमती सेन्ट्रल जेल के सुपरिंटेंडेंट से उसके जेल में रहने की विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी.

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हाईकोर्ट ने जेल के सुपरिंटेंडेंट से पूछा हैं कि बाबू बजरंगी किस तरह रहता है. अदालत ने जेल अधीक्षक को सोमवार तक यह रिपोर्ट देने को कहा कि वर्ष 2002 के नरौदा पाटिया नरसंहार मामले में मृत्युपरांत उम्रकैद की सजा काट रहे बजरंगी जेल में किस तरह रहता है.

बजरंगी ने जेल अधिकारियों के रिपोर्ट पेश करने से पहले ही अपनी जमानत याचिका वापस ले ली. इस पहले बाबू बजरंगी को एक रिश्तेदार की शादी में शिरकत से लेकर बीमार पिता की तीमारदारी की वजह बताकर चार अलग-अलग मौकों पर जेल से बाहर जाने की इजाजत मिल चुकी है.

गौरतलब रहें कि साल 2012 में गुजरात की पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बाबू बजरंगी सहित 30 दूसरे लोगों को नरोदा पाटिया नरसंहार का दोषी पाया गया था. 2002 में दंगों की आग में झुलस रहे गुजरात में नरोदा पाटिया में तीन दिनों तक खूनी खेल चला था.

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