दुनिया के सबसे बा खराब नरसंहारों में से एक गुजरात दंगों के दोषी और दक्षिणपंथी संगठन बजरंग दल के पूर्व बाबू बजरंगी को लेकर गुजरात हाईकोर्ट ने साबरमती सेन्ट्रल जेल के सुपरिंटेंडेंट से उसके बारें में रिपोर्ट मांगी हैं.

ये रिपोर्ट उसके जेल में रहने पर हैं. हाईकोर्ट ने जेल के सुपरिंटेंडेंट से पूछा हैं कि बाबू बजरंगी किस तरह रहता है. अदालत ने जेल अधीक्षक को सोमवार तक यह रिपोर्ट देने को कहा कि वर्ष 2002 के नरौदा पाटिया नरसंहार मामले में मृत्युपरांत उम्रकैद की सजा काट रहे बजरंगी जेल में किस तरह रहता है.

ये रिपोर्ट उसकी जमानत याचिका को लेकर तलब की जा रही हैं. उसने नियमित जमानत की दरख्वास्त करते हुए कहा कि वह पूरी तरह अंधा हो चुका है, उसका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है और वह एक कान से सुनने में बड़ी मुश्किल हो रही है. ऐसे में उसे जमानत दी जाए.

अप्रैल में बजरंगी अहमदाबाद स्थित साबरमती जेल से चेन्नै में आंख दिखाने के लिए परोल पर रिहा हुआ था. तीन महीने की बेल मेडिकल ग्राउंड पर बजरंगी को मिली थी. बजंरगी की सेहत पर डॉक्टरों ने कहा था कि वह अपनी आंखों की रोशनी तेजी से खो रहा है। इसी आधार पर गुजरात हाई कोर्ट ने तय समय के लिए बेल दी थी.

इस पहले बाबू बजरंगी को एक रिश्तेदार की शादी में शिरकत से लेकर बीमार पिता की तीमारदारी की वजह बताकर चार अलग-अलग मौकों पर जेल से बाहर जाने की इजाजत मिल चुकी है.

साल 2012 में गुजरात की पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बाबू बजरंगी सहित 30 दूसरे लोगों को नरोदा पाटिया नरसंहार का दोषी पाया गया था. 2002 में दंगों की आग में झुलस रहे गुजरात में नरोदा पाटिया में तीन दिनों तक खूनी खेल चला था.


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