बरसों से अयोध्या बाबरी मस्जिद और राम जन्मभूमि विवाद को लेकर चर्चित रही हो. लेकिन दूसरी और अपनी गंगा-जमुनी तहजीब के लिए भी अयोध्या जानी जाती है. इस का नजारा एक बार फिर से देखने को मिला।

सोमवार को अयोध्या के सरयू कुंज स्थित 500 साल पुराने मंदिर में इफ्तार का आयोजन किया गया. ये मंदिर राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल के पास ही है. इस इफ्तार को राजनीति से दूर रखा गया.

इफ्तार में केवल आम लोगों को बुलाया गया. सरयू कुंज के महंत जुगल किशोर शरण शास्त्री ने बताया, ‘हम यह संदेश देना चाहते हैं कि इस कदम के पीछे कोई राजनीतिक मंशा नहीं है. हम अयोध्या से दुनिया को शांति का संदेश देना चाहते हैं.’

babri masjid

इफ्तार के बाद मगरिब की नमाज भी मंदिर परिसर में ही की गई. इससे पहले सांप्रदायिकता के खिलाफ एक सेमिनार का आयोजन भी मंदिर में किया गया. सेमिनार में कॉलेज के छात्रों, शिक्षकों आदि ने हिस्सा लिया और सांप्रदायिक तनाव को कम करने की प्रतिज्ञा ली.

कार्यक्रम के बारे में एक पंडित ने कहा, ‘हमारा विचार है कि दोनों समुदायों के बीच की दूरियों को कम करने के प्रयास करने चाहिए. मुस्लिमों के लिए इफ्तार का आयोजन दोनों समुदायों को नजदीक लाने का अच्छा मौका है. इसलिए हमने रोजा इफ्तार के बहाने शांति का संदेश देने का फैसला किया.’

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