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राजस्थान के बूँदी ज़िले में स्थित बाबा मीरा साहब की पहाड़ी पर दरगाह के करीब कुछ दिनों पहले रखी गई अवैध मूर्ति के पूजन को लेकर चल रहा तनाव शांत होने का नाम नहीं ले रहा है.

भगवा संगठनों की और से नव वर्ष के मौके पर पूजन का ऐलान किया गया था. जिसे जिला प्रशासन ने रोक दिया था. एक बार फिर से इस मुद्दें को उठाते हुए भगवा संगठनों की और से बूंदी सहित आज पुरे हाडोती बंद का ऐलान किया है. विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों ने बताया कि बूंदी के मामले को लेकर वीएचपी बूंदी जिला कलेक्टर और कोटा रेंज आईजी को हटाने की मांग कर रहा है.

बंद के आह्वान के मद्देनजर जिला कलेक्टर शिवांगी स्वर्णकार ने गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक उप्रेती को ई मेल कर 29 अधिकारियों को  कार्यपालक मजिस्ट्रेट का अग्रिम शक्तियां प्रदान करने का अनुरोध किया है.

जिला कलेक्टर स्वर्णकार ने मेल में लिखा है कि बूंदी मुख्यालय पर टाइगर हिल स्थित मानदाता छतरी पूजा अर्चना को लेकर कुछ संगठनों ने बंद का आह्वान किया है. सोशल मीडिया पर इस संबंध में अनेक प्रकार की टिप्पणियां और अफवाहें फैलाई जा रही हैं. ऐसी स्थिति को देखते हुए 29 जनवरी तक कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अग्रिम शक्तियां प्रदान की जाए.

ये है मामला:

बून्दी शहर की ऐतिहासिक दरगाह जिसे हज़रत बाबा मीरा साहब (रह.) के नाम से जाना जाता है. ये  दरगाह तारागढ़ के नाम से भी प्रसिद्ध हैं. यह दरगाह बून्दी में तीन पहाड़ियों में से एक पहाड़ी जो सबसे ऊंची औऱ बड़े क्षेत्रफल में फैली हुई है. साथ ही रास्ते में भी एक दरगाह है. जो हज़रत बाबा दूल्हे साहब (रह.) की हैं.

दरगाह के मैन गेट रोड़ पर छोटी ईदगाह स्थित है. जहाँ से दरगाह जाने के लिए 15 फिट का छोड़ा रास्ता भी बना हुआ है. यहाँ पर पुरातात्विक काल से एक छतरी थी जो 1917 में तेज़ अंधी-तूफ़ान के चलते गिर गई और जमीन में धंस गई. जिसको बूंदीवासी और प्रशासन भी भूल गया था.

कथित तौर पर बीते 27 अप्रैल, 2017 को टाइगर हिल की आड़ में  विशव हिन्दू परिषद, शिव सेना औऱ बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने छतरी की जगह पर अवैध तरीके से हनुमान की मूर्ति रख दी. प्रशासन ने दबाव के चलते बाद में यहाँ पर चबूतरे का निर्माण करा दिया.

इसी बीच भगवा संगठनों ने नव वर्ष के मौके पर 1 जनवरी को पूजन कार्यक्रम का ऐलान किया. भगवा संगठनों का दावा है कि पुराने जमाने में मानधाता छतरी में देव प्रतिमाएं स्थापित थीं, पुजारी और आम नागरिक पूजा करते थे. हालांकि प्रशासन ने इस पूजन क इजाजत नहीं दी.

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