अयोध्या: सीताराम मंदिर के परिसर में इफ्तार, साधु-संतों के साथ रोजदारों ने खोला रोजा

8:30 pm Published by:-Hindi News

राम जन्मभूमि में वर्षों पुरानी हिंदू मुस्लिम एकता और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश की गई। अयोध्या में सरयू कुंज मंदिर में सर्वधर्म समभाव ट्रस्ट ने रोजा इफ्तार का आयोजन कराया। इस रोजा इफ्तार में मुस्लिम समुदाय के साथ साधु-संत और सिख समुदाय के लोग भी शामिल हुए।

महंत युगल किशोर दास ने कहा कि रोजा इफ्तार का उद्देश्य था कि हिंदू और मुस्लिम भाई सब मिल-जुल कर रहें। उन्होंने कहा कि अयोध्या किसी एक समुदाय की नगरी नहीं है। यह सब के लिए पुण्य नगर है। भेदभाव खत्म करने का संदेश अगर मिल सकता है तो अयोध्या से मिल सकता है।

युगल किशोर ने कहा कि अगर 6 दिसंबर 1992 के पहले इस तरीके की पहल की गई होती तो यह 6 दिसंबर की घटना न होती, वहीं इफ्तार में शामिल मुस्लिमों ने कहा कि हम देश के अमन-चैन की बात करते हैं और इस तरीके की पहल भाईचारे और अमन चैन के लिए की गई है। मुस्लिमों ने कहा कि हम हिंदुओं के त्यौहार पर भी शामिल हों और पूरे देश में अयोध्या से ही अमन चैन का संदेश दें।

इफ्तार पार्टी में शामिल हुए मुजम्मिल फिजा ने कहा कि वे हर साल नवरात्रि को हिंदू भाइयों के साथ मनाते हैं। एक एजेंडा वाले लोग नहीं चाहते हैं कि हम सब एक साथ आएं और हर त्योहार को साथ मिलकर बनाएं।

वहीं एक अन्य रोजेदार मोहम्मद तुफैल का कहना है कि विवादित स्थल के बगल में ही है रामजानकी मंदिर है, जहां पर विवाद है और पूरी दुनिया में झगड़े की वजह है। वहीं इस मंदिर में रोजा इफ्तार कराके यह एकता और मानवता का संदेश भी दिया जा रहा है कि सभी धर्मों के लोगों को आपस में मिलकर रहना चाहिए।

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