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असम पुलिस ने एक पूर्व सैनिक की देश सेवा को कलंकित कर दिया.  30 साल तक सेना में रहकर देश की सेवा करने वाले मोहम्मद अजमल हक को असम पुलिस ने बांग्लादेश घुसपैठिया करार देते हुए उनके खिलाफ नोटिस जारी कर दिया है.

असम पुलिस की इस करतूत के चलते आज देश की सीमाओं की हिफाजत करने वाले जूनियर कमीशंड ऑफिसर के पद से रिटायर हुए अजमल को अपने भारतीय होने के सबूत देने पड़ रहे है. अब अजमल को 3 अक्टूबर को ट्राइब्यूनल के समक्ष पेश होकर अपनी नागरिकता की पुष्टि करनी है.

हक़ के खिलाफ ये नोटिस जुलाई में जारी किया गया था. अजमल ने बताया कि उन्होंने 1986 में टेक्निशियन के तौर पर सेना जॉइन की थी. वे अब परिवार के साथ गुवाहटी में रह रहे है. उनका बेटा पिता की तरह फ़ौज में जाने के लिए बेइंडियन मिलिट्री कॉलेज देहरादून में पढ़ रहा है, वहीँ बेटी गुवाहाटी के नारेंगी स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल की छात्रा है.

नोटिस में उन्हें जिला पुलिस द्वारा उनके खिलाफ केस दर्ज करने की जानकरी दी गई है. उन पर 25 मार्च, 1971 के बाद भारत में बिना किसी दस्तावेज के घुस आने का आरोप हैं.  हालांकि उनका कहना है वे खानदानी तौर पर असमिया मूल के है.

उन्होंने बताया कि उनके पिता का नाम 1966 की वोटर लिस्ट में भी था. यही नहीं उनकी मां का नाम 1951 के नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस में भी था. हक ने कहा, ‘मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि ट्राइब्यूनल से मुझे न्याय मिलेगा. लेकिन, इससे मुझे दर्द होता है, जब मेरी बेटी पूछती है कि जिस देश की आपने इतने साल सेवा की, वहां ऐसा बर्ताव कैसे हो सकता है.’

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