यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट( AIUDF) के चीफ और लोकसभा सांसद बदरुद्दीन अजमल

गुवाहाटी  नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (एनआरसी) का पहला ड्राफ्ट सोमवार को जारी कर दिया गया है. इस ड्राफ्ट में 3.29 करोड़ लोगों में से 1.9 करोड़ लोगों के नाम शामिल किये गए है. यानि 1.9 करोड़ को ही भारत का वैध नागरिक माना गया है.

इस ड्राफ्ट में प्रतिबंधित संगठन उल्फा-आई (ULFA-I)के उग्रवादी परेश बरुआ का नाम शामिल है. लेकिन ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट( AIUDF) के चीफ और लोकसभा सांसद बदरुद्दीन अजमल और उनके दो बेटों के नाम नहीं हैं.

बरुआ का नाम एआरएन नंबर 101831002065041801069 के तहत निवासी जेरईगांव, डिब्रूगढ़ के तौर पर शामिल किया गया है. साथ ही उसके पुरे परिवार का नाम भी इस लिस्ट में शामिल है. बरुआ के अलावा उल्फा-आई (ULFA-I) के एक और बड़े नेता अरुनोदोई दोहुतिया का नाम भी पहले ड्राफ्ट में शामिल है.

असम में लाखों लोगों को ये साबित करना है कि उनके माता-पिता 1971 में बांग्लादेश बनने से पहले ही असम में आकर रहने लगे थे. जिन लोगों का नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (एनआरसी) में नाम शामिल नहीं होगा. उन्हें विदेशी माना जाएगा.

paresh barua
प्रतिबंधित संगठन उल्फा-आई (ULFA-I) उग्रवादी परेश बरुआ

ध्यान रहे असम में मुसलमानों की आबादी 34 फीसदी से ज्यादा है. माना जाता है कि इनमे कई लोग बांग्लादेशी है. बीजेपी चुनावों से पहले वादा कर चुकी थी कि वह अवैध बांग्लादेशी मुस्लिमों को निकालेगी और असम में अवैध घुसपैठ करने वाले हिंदुओं को नागरिक का दर्जा देगी.

इसी सिलसिले में नागरिकता कानून में संशोधन के लिए एक कानून संसद में लंबित है. ऐसे में स्पष्ट है कि जो जिन मुसलमानों का नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (एनआरसी) में नाम नहीं आया वो विदेशी होंगे. वहीँ दूसरी और जो हिन्दू विदेशी है उनको असम की बीजेपी सरकार भारत की नागरिकता देगी.

इस पुरे मामले में बीजेपी का मकसद असम में मुस्लिमों की जनसँख्या कम कर बांग्लादेश से आए हिंदुओं को नागरिक का दर्जा देना है. ताकि असम हिंदू बहुल राज्य बना रहे.

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