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असम में चल रहे नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर आज मंगलवार को भारी विरोध के बीच 40 संगठनों ने बंद का आह्वान किया था। जिसका व्यापक असर देखने को मिला।

बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों ने राज्य भर में रेलवे पटरियों पर अवरोधक लगाने और ट्रेन परिचालन को बाधित करने की कोशिश की। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन के परिचालन को बाधित करने की कोशिश कर रहे लोगों को वहां से हटा दिया गया है। प्रदर्शनकारियों ने राज्य के विभिन्न स्थानों पर सड़कों पर टायर जलाए। सार्वजनिक परिवहन की गाड़ियों को पुलिस की सुरक्षा दी गई है ताकि बंद के दौरान यातायात सुविधा सामान्य रह सके।

कृषक मुक्ति संग्राम समिति के नेता अखिल गोगोई ने कहा है किअसम जातियतावादी युवा छात्र परिषद (एजेवाईसीपी) और अन्य 40 संगठनों ने बंद के लिए हाथ मिलाया है।

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गोगोई ने कहा, ‘बीजेपी सरकार असम की जाति, माटी और भेटी की रक्षा का वादा कर यहां सत्ता में आई थी। लेकिन यह अपने वादे से मुकर गई और स्थानीय समुदायों के खिलाफ एक साजिश रच रही है। असम की बीजेपी सरकार संविधान संशोधन विधेयक के जरिए हिंदू बंगालियों को नागरिकता देना चाहती है। मेघालय में मंत्रिमंडल ने विधेयक का विरोध करने का निर्णय पहले ही ले लिया है, जहां बीजेपी भी सरकार का हिस्सा है।’

उन्होंने कहा, ‘हमने पूरी ताकत के साथ विधेयक का विरोध करने का निर्णय लिया है, क्योंकि यह असम में स्थानीय समुदायों को प्रभावित करेगा।’ गोगोई ने असम सरकार से यह मांग भी की कि वह हिंदू बंगालियों के एक संगठन द्वारा नागरिकता विधेयक के समर्थन में 17 नवंबर को प्रस्तावित एक सम्मेलन को रोके।

गोगोई ने चेताया कि यदि हिंदू बंगालियों को सम्मेलन आयोजित करने की अनुमति दी गई तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा, ‘हिंदू बंगाली संगठनों को आरएसएस का समर्थन प्राप्त है और वे असम में कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा करना चाहते हैं। हम मांग करते हैं कि सरकार सम्मेलन को रोके।’

उन्होंने कहा, “हिंदू बंगाली संगठनों को आरएसएस का समर्थन प्राप्त है और वे असम में कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा करना चाहते हैं। हम मांग करते हैं कि सरकार सम्मेलन को रोके।”

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