हड़ताल और प्रदर्शन के दौरान नारेबाज़ी का एक दृश्य

अजय किशोर झा

अरुणाचल प्रदेश की 13  ट्रेड यूनियन की महाहड़ताल ने राज्य में कामकाज ठप कर दिया। राजधानी इटानगर में हज़ारों मज़दूरों और कर्मचारियों के नारों से राजधानी ठहर सी गई। राजधानी में क़रीब 25 हज़ार से ज़्यादा प्रदर्शनकारी पहुँचे जबकि राज्य के 18 ज़िलों के मुख्यालय पर अलग से प्रदर्शन हुए हैं। न्यूनतम वेतन 18 हज़ार रुपए किए जाने की माँग को लेकर हुए प्रदर्शन के लिए सभी 13 ट्रेड यूनियन ने मुख्यमंत्री पेमा खांडू और उनकी सरकार की तीखी आलोचना की है।

ज्वाइंट वर्किंग कमेटी ऑफ अरुणाचल प्रदेश ट्रेड यूनियन यानी JWCAPTU की अगुवाई में राजधानी इटानगर की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे  महाहड़ताल में कोई श्रम संगठन नहीं बचा, जिसने हिस्सा ना लिया हो। प्रदर्शन में राजधानी इटानगर की 25 हज़ार से अधिक की भीड़ के अलावा सभी 18 ज़िलों में ज़िला मुख्यालय पर JWCAPTU ने अलग से प्रदर्शन और हड़ताल का आह्वान किया।

हड़ताल और प्रदर्शन आह्वान करने वाले संगठन के अध्यक्ष चंगमा ताजो और महासचिव केन्कर योम्चा

 JWCAPTU  के अध्यक्ष चंगमा ताजो ने बताया कि प्रदर्शनकारी कर्मचारी और मज़दूर माँग कर रहे हैं कि अरुणाचल प्रदेश सरकार न्यूनमत वेतन 18 हज़ार रुपए किया जाए। पिछले 12 साल से काम कर रहे अस्थाई लोगों को पक्की नौकरी की माँग की जा रही है। सरकारी दफ़्तरों में अस्थाई काम करे स्किल्ड और नॉन स्किल्ड कर्मचारियों को स्थाई करने की ये संगठन मांग  कर रहे हैं। साल में 15 दिन के वेतन का एक्सग्रेशिया, सभी विभागों में C और D प्रकार की नौकरियों में 75 प्रतिशत आरक्षण, वन और पर्यावरण विभाग में मास्टर रोल सिस्टम का अंत, ठेके पर कार्य कर रही आँगनबाड़ी कर्मचारियों और सहायकों को स्थाई किए जाने, टेक्सी और व्यावसायिक वाहनों का रंग अलग करने, सभी पंजीकृत कर्मचारियों और मज़दूरों को मकान के लिए लोन देने और ग़ैर ज़रूरी सामान की ख़रीद और ऑवर प्राइसिंग की जाँच कर दोषियों को दंडित करने की भी मज़दूर माँग कर रहे हैं। JWCAPTU के प्रदर्शन के बाद मज़दूर और कर्मचारियों को लम्बे समय बाद एक साथ प्लेटफॉर्म पर आने का मौक़ा मिला है।

JWCAPTU के महासचिव केन्कर योम्चा ने बताया कि संयुक्त संगठनों का आंदोलन 6 फ़रवरी से चल रहा है और माँगे नहीं माने जाने तक इसे अनिश्चितकालीन भी किया जा सकता है। बुधवार, 29 मार्च के प्रदर्शन और राजधानी इटानगर के जाम होने के बाद मुख्यमंत्री पेमा खांडू काफ़ी दबाव में आ गए हैं और उन्होंने कर्मचारी नेताओं को बातचीत के लिए गुरुवार को बुलाया है। अगर यह बात कामयाब नहीं होती है तो यह तो निश्चित है कि अरुणाचल प्रदेश के इतिहास के सबसे बड़े प्रदर्शन का सबसे अधिक समय तक चलने वाले आंदोलन के रूप में भी नाम दर्ज हो सकता है।

बुधवार की हड़ताल के बाद कर्मचारी और मज़दूरों में काफ़ी जोश बढ़ गया है। दिन भर बरसात होने के बावजूद वह अपने स्थान से नहीं हिले। रैली में महिलाओं की भारी भागीदारी देखने को मिली जिसमें वह अपना न्यूनतम वेतन बढ़ाने को लेकर प्रदर्शन में काफ़ी आक्रामक नज़र आ रही थीं। प्रदर्शनकारी मज़दूरों ने अपने हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया जिसमें लिखा था कि विधायक का वेतन तीन लाख रुपए और हमारा वेतन एक हज़ार रुपए महीना है। यह सरासर अन्याय है। अरुणाचल प्रदेश के ट्रेड यूनियन मज़दूर कर्मचारी इतिहास के सबसे बड़े इस प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय काफ़ी दबाव में आ गया है। JWCAPTU के महासचिव केन्कर योम्चा ने हमें बताया कि हमारे संगठन ने वैसे भी 18 अप्रैल तक विभिन्न धरना प्रदर्शन और विरोध के कार्यक्रम की सूची तैयार है, अगर तब तक भी प्रदेश की सरकार ने हमारी माँगों पर ध्यान नहीं दिया तब भी हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा।

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